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सुप्रीम कोर्ट का आदेश शेयर कर महुआ मोइत्रा ने उठाए सवाल, ‘न्यायपालिका भी संविधान से ऊपर नहीं’, CEC की बेटी को क्यों मिली राहत?

महुआ मोइत्रा ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश और CEC ग्यानेश कुमार की बेटी मेधा रूपम से जुड़े मामले की लिस्टिंग पर सवाल उठाए हैं। जानिए अकृति चौधरी NSA केस और पूरे विवाद की वजह।
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Sep 26, 2026
Mahua Moitra Supreme Court Order Copy Justice Nagarathna Medha Roopam Gyanesh Kumar
महुआ मोइत्रा (फोटो सोर्स - एएनआई)

Mahua Moitra Supreme Court Roster Row: तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश को लेकर न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने एक्स पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी शेयर करते हुए नोएडा की जिलाधिकारी मेधा रूपम से जुड़े मामले की सुनवाई और इसकी लिस्टिंग पर सवाल खड़े किए। मेधा रूपम मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ग्यानेश कुमार की बेटी हैं। महुआ मोइत्रा ने अपने पोस्ट में कहा कि न्यायपालिका संविधान से ऊपर नहीं है और न ही उसे सवालों से परे माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि नोएडा की छात्रा अकृति चौधरी की हिरासत से जुड़े मामले की याचिका जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच के सामने सूचीबद्ध हुई, जबकि मौजूदा रोस्टर को लेकर इस लिस्टिंग पर सवाल उठाए गए हैं।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि ग्यानेश कुमार की बेटी से जुड़े मामले की सुनवाई जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच के सामने कैसे पहुंची। महुआ ने जस्टिस शर्मा के बेटे के चुनाव आयोग के लिए वकील के तौर पर पेश होने का भी जिक्र किया।

महुआ मोइत्रा ने क्या-क्या कहा?

महुआ मोइत्रा ने लगातार पोस्ट कर इस मामले को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका भी संविधान और जांच-पड़ताल से ऊपर नहीं है। अपनी पोस्ट में उन्होंने नोएडा की छात्रा की हिरासत से जुड़ी याचिका की लिस्टिंग का जिक्र किया। लिखा कि यह मामला जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच के सामने आया, जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) और हिरासत से जुड़े मामलों की सुनवाई को लेकर मौजूदा रोस्टर में दूसरी बेंचों को जिम्मेदारी दी गई है।

महुआ ने इसी तुलना में CEC ग्यानेश कुमार की बेटी मेधा रूपम से जुड़े मामले की लिस्टिंग पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जब दोनों मामलों में रोस्टर का सवाल है तो एक मामले की सुनवाई अलग तरीके से क्यों हुई।

महुआ ने अपनी पोस्ट में ग्यानेश कुमार पर व्यक्तिगत आरोप भी लगाए और पूछा कि वह इस मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सफाई क्यों नहीं दे रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए ग्यानेश कुमार के पद पर बने रहने को लेकर टिप्पणी की है। ये महुआ मोइत्रा के राजनीतिक आरोप और सवाल हैं।

क्या है अकृति चौधरी और मेधा रूपम का पूरा मामला?

पूरा विवाद दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अकृति चौधरी की NSA के तहत हिरासत से जुड़ा है। अकृति को अप्रैल 2026 में नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA लगाया गया। अकृति ने अपनी हिरासत को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। 2 सितंबर 2026 को हाई कोर्ट ने उनकी NSA हिरासत रद्द कर दी। कोर्ट ने कहा था कि अगर वह किसी दूसरे मामले में वांछित नहीं हैं तो उन्हें रिहा किया जाए।

हाई कोर्ट ने मामले में अधिकारियों की भूमिका पर भी कड़ी टिप्पणियां कीं और अकृति को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। इस रकम की वसूली संबंधित अधिकारियों के वेतन से करने का निर्देश दिया गया था। इसमें गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम भी शामिल थीं।

मेधा रूपम ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की याचिका

इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ मेधा रूपम ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी। इन याचिकाओं पर जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की बेंच ने 23 सितंबर को सुनवाई की। उसी दिन कोर्ट ने मामले में आदेश सुरक्षित रखा। सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा भी बंद कर दी गई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के शुरुआती आदेश को लेकर भ्रम पैदा हुआ। शुरुआती आदेश से ऐसा लगा कि हाई कोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी गई है, जिसमें अकृति चौधरी की NSA हिरासत रद्द की गई थी। लेकिन अगले दिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश को संशोधित कर स्थिति स्पष्ट कर दी।

सुप्रीम कोर्ट ने किस हिस्से पर लगाई रोक?

सुप्रीम कोर्ट के संशोधित आदेश के मुताबिक, हाई कोर्ट के उस हिस्से पर रोक लगाई गई है जिसमें मेधा रूपम के खिलाफ सख्त टिप्पणियां की गई थीं और 5 लाख रुपये का मुआवजा उनकी सैलरी से वसूलने का निर्देश दिया गया था। महत्वपूर्ण बात यह है कि अकृति चौधरी की NSA हिरासत रद्द करने वाले हाई कोर्ट के फैसले पर रोक नहीं लगाई गई है। यानी सुप्रीम कोर्ट ने मेधा रूपम को इस मामले में कुछ राहत जरूर दी है, लेकिन यह राहत हाई कोर्ट की टिप्पणियों और मुआवजे की वसूली वाले हिस्से तक सीमित है।

फिर रोस्टर का विवाद क्यों उठा?

सुप्रीम कोर्ट में मेधा रूपम की याचिका की सुनवाई जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच के सामने होने के बाद मामले की लिस्टिंग और रोस्टर को लेकर सवाल उठे। लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन (LAFC) ने 24 सितंबर को CJI को पत्र लिखकर इस मामले की सुनवाई पर आपत्ति जताई। संगठन ने सवाल किया कि अकृति चौधरी की NSA हिरासत से जुड़ा मामला जस्टिस शर्मा की बेंच के सामने कैसे सूचीबद्ध हुआ, जबकि उसके मुताबिक मौजूदा रोस्टर में ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए दूसरी बेंच निर्धारित हैं। संगठन ने दोबारा सुनवाई की मांग भी की है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि रोस्टर को लेकर उठाई गई आपत्ति एक वकील संगठन की शिकायत है। इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि सुनवाई में किसी तरह की अनियमितता या पक्षपात हुआ।

जस्टिस शर्मा के बेटे का चुनाव आयोग से क्या संबंध है?

महुआ मोइत्रा ने जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा के बेटे सिद्धार्थ शर्मा का भी जिक्र किया। लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सिद्धार्थ शर्मा मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुनाव आयोग के स्टैंडिंग काउंसल हैं। इसी पेशेवर संबंध को लेकर जस्टिस शर्मा की बेंच के सामने CEC और उनकी बेटी से जुड़े मामलों की सुनवाई को लेकर न्यायिक औचित्य और संभावित हितों के टकराव के सवाल उठाए गए हैं।

23 सितंबर 2026 को जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच के सामने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाएं भी आई थीं। दोनों जजों की राय अलग रही। जस्टिस शर्मा ने मामले को संविधान पीठ के सामने भेजे जाने के पक्ष में राय दी थी।

महुआ मोइत्रा ने ग्यानेश कुमार को क्यों घेरा?

महुआ मोइत्रा ने इस पूरे घटनाक्रम को CEC ग्यानेश कुमार से भी जोड़ा है। उनका कहना है कि जब उनकी बेटी से जुड़े मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो CEC को इस पर सार्वजनिक रूप से जवाब देना चाहिए। उन्होंने ग्यानेश कुमार से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सफाई देने की मांग की और केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा है। अपने पोस्ट में महुआ ने ग्यानेश कुमार के पद पर बने रहने को लेकर भी तीखी राजनीतिक टिप्पणी की।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने अकृति चौधरी की NSA हिरासत रद्द करने वाले इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक नहीं लगाई है। संशोधित आदेश में हाई कोर्ट की मेधा रूपम के खिलाफ टिप्पणियों और 5 लाख रुपये मुआवजे की वसूली वाले हिस्से पर रोक बरकरार है। मामले पर आगे सुनवाई होनी है।

Updated on:
26 Sept 2026 09:28 am
Published on:
26 Sept 2026 09:28 am