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वंदे मातरम् के पूरे छंद नहीं गाने पर छिड़े विवाद पर मल्लिकार्जुन खरगे ने दिया बयान

वंदे मातरम् के पूरे छंद नहीं गाने पर छिड़े विवाद पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रतिक्रिया जाहिर की है। क्या कहा खरगे ने? आइए नज़र डालते हैं।
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Aug 19, 2026
Mallikarjun Kharge
मल्लिकार्जुन खरगे (Photo - ANI)

राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् (Vande Mataram) को लेकर देश की सियासत में पारा चढ़ा हुआ है। पहले स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस (Congress) मुख्यालय और अब गोवा में कांग्रेस की बैठक में वंदे मातरम् के पूरे छंद नहीं गाने पर विवाद छिड़ गया है। इस पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) ने दो टूक कहा कि वंदे मातरम् के केवल दो छंद गाना अपराध है तो महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi), सरदार वल्लभभाई पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel), जवाहरलाल लेहरू (Jawaharlal Nehru) और अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) पर भी मामला दर्ज किया जाना चाहिए।

90 सालों से चली आ रही परंपरा को जारी रखा

खरगे ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, "मैंने वही वंदे मातरम् गाया जो महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू ने गाया था। अगर इसे गाना कोई अपराध है, तो वो पिछले 18 सालों से यह अपराध करते आ रहे हैं। अगर यह अपराध है, तो गांधी जी के खिलाफ केस दर्ज करें। अगर यह अपराध है, तो नेहरू जी के खिलाफ केस दर्ज करें। अगर यह अपराध है, तो वल्लभभाई पटेल के खिलाफ भी करें। उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि उनके जन्म से पहले ही कांग्रेस ने देश के लिए कौन से राष्ट्रीय गीत अपनाए जाएं, इस पर एक प्रस्ताव पास कर दिया था। ऐसा नहीं है कि आप जो कह दें, वही राष्ट्रीय मानक बन जाए। कल कोई दूसरी सरकार सत्ता में आ सकती है; अगर वो कुछ कहते हैं, तो क्या वही नियम बन जाएगा? हमने बस उसी परंपरा को जारी रखा है जो 90 सालों से चली आ रही है।"

क्या कहता है नया कानून?

सरकार द्वारा जारी किए गए नए कानून में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के गायन को जानबूझकर रोकने या उसके गायन के दौरान किसी सभा में व्यवधान उत्पन्न करने पर दंडित करने का प्रावधान किया गया है। इससे पहले जनवरी में गृह मंत्रालय ने आदेश जारी कर तिरंगा फहराने, किसी कार्यक्रम में राष्ट्रपति के आगमन, राष्ट्र के नाम उनके भाषणों और संबोधनों से पहले और बाद में और राज्यपालों के आगमन और भाषणों से पहले और बाद में सहित कई आधिकारिक अवसरों पर वंदे मातरम् बजाना अनिवार्य होगा। मंत्रियों या अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों की मौजूदगी वाले गैर-औपचारिक लेकिन जरूरी कार्यक्रमों में भी राष्ट्रगीत सामूहिक रूप से गाया जा सकता है, बशर्ते इसे पूरा सम्मान और शिष्टाचार के साथ पेश किया जाए।