
एआई (Representational Photo)
एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI - Artificial Intelligence) का इस्तेमाल कई सेक्टर्स में होने लगा है। समय के साथ एआई और ज़्यादा स्मार्ट और एडवांस हो रहा है। भारत के हेल्थकेयर सेक्टर में भी एआई का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ रहा है। फिलिप्स फ्यूचर हेल्थ इंडेक्स 2026 की भारत रिपोर्ट के अनुसार 71% हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स का मानना है कि एआई की मदद से उनकी कार्यक्षमता बढ़ी है।
भारत के 71% हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स का कहना है कि वो औसतन हर हफ्ते 10 मरीज ज़्यादा देख पा रहे हैं। हालांकि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 50% है। वहीं भारत में मरीज भी इस बदलाव को अपना रहे हैं। 68% मरीजों ने कहा कि एआई ने उन्हें डॉक्टर के साथ मिलने वाले समय का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद की है।
फिलिप्स फ्यूचर हेल्थ इंडेक्स 2026 की रिपोर्ट को तैयार करने के लिए 10 देशों के 2,000 से ज्यादा हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स और 20,000 से ज़्यादा मरीजों को शामिल किया गया। भारत में 200 हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स और 2,004 मरीजों से बात की गई।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 85% हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स मानते हैं कि एआई मरीजों के इलाज के नतीजों को बेहतर कर सकता है। 2025 की रिपोर्ट में यह आंकड़ा 76% था। यानी एक साल में एआईआइ को लेकर हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स का भरोसा बढ़ा है। वहीं 48% हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स ने बताया कि पिछले तीन महीनों में एआई ने कम से कम तीन बार किसी संभावित मेडिकल गलती को रोकने में मदद की।
एआई हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स का समय भी बचा रहा है। 58% हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स ने बताया कि एआई की वजह से हर साल कम से कम 132 घंटे का समय बच रहा है। यह तीन से ज़्यादा कामकाजी हफ्तों के बराबर है। वहीं समय बचने का असर मरीजों से बातचीत पर भी दिखाई दे रहा है। समय बचाने वाले हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स में 75% का कहना है कि अब वो मरीजों के साथ ज़्यादा विस्तार से बातचीत कर पा रहे हैं।
86% हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स का कहना है कि एआई से मिलने वाले हर आउटपुट पर इंसानी निगरानी ज़रूरी है। वहीं 78% हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स के अनुसार एआई से तैयार हुई गलत जानकारी को ठीक करना पड़ा है। ऐसे में एआई की मदद लेना गलत नहीं है, लेकिन इस पर पूरी तरह से निर्भरता सही नहीं है।
Updated on:
19 Aug 2026 04:15 am
Published on:
19 Aug 2026 04:15 am
