
Mallikarjun Kharge Vote Chori: देश की राजनीति में चुनावी पारदर्शिता अब नए विवाद में फंस गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा निशाना लगाया। उन्होंने ऐसे सवाल पूछे हैं, जिनकी गूंज संसद और चुनाव आयोग तक पहुंच रही है। खरगे सरकार को घेरते हुए बोले-मतदाता सूची में गड़बड़ी, घुसपैठियों के आंकड़े, और वोटर लिस्ट की समीक्षा को लेकर सरकार खुद साफ-साफ जवाब देने के बजाय बयानबाजी में उलझ रही है। उनका कहना है, इन आरोपों का जवाब जानकारी से दें, खुली बहस में सामने आकर बात करें, सिर्फ शब्दों की लड़ाई न करें।
खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मोदी और शाह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। खरगे ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सीधे सवाल उठाए। उनका आरोप है प्रधानमंत्री राहुल गांधी के सवालों का सही जवाब देने के बजाय पुराने आरोपों की घिसी-पिटी रट लगा रहे हैं।
खरगे ने मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर भी सवाल उठाए और कहा-सरकार वोट चोरी के आरोप और राहुल गांधी की चुनौती से बच रही है। उन्होंने वह भी याद दिलाया जब राहुल गांधी ने बाहरी देशों के सामने भारतीय हित गिरवी रखने पर चर्चा की मांग की थी-सरकार इस पर अंतिम जवाब देने से भी कतरा रही है।
अमित शाह के बयान पर भी खरगे ने पलटवार किया। शाह ने तीन करोड़ मतदाताओं को घुसपैठिया बताया था खरगे ने सीधे पूछा, अगर इतने बड़े पैमाने पर अवैध घुसपैठ हो गई, तो वर्षों से गृह मंत्री रहे अमित शाह ने इसे रोकने के लिए क्या किया? आखिर इतने वक्त में सरकार ने कौन-से ठोस कदम उठाए, जनता को जवाब चाहिये।
खरगे ने चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया यानी एसआईआर (SIR) पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि आयोग इस प्रक्रिया को लेकर पांच बार अपना रुख बदल चुका है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने फॉर्म-6 में किए गए बदलावों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि जिस बदलाव को कथित तौर पर अन्य चुनाव आयुक्तों ने पहले अवैध बताया था, उसमें बाद में बदलाव क्यों किया गया?
यह विवाद नए वोटरों के नाम जोड़ने और चुनाव में पारदर्शिता को लेकर उठा है। फॉर्म-6 नया वोटर बनने के लिए रजिस्ट्रेशन वाला फॉर्म है।
खरगे ने संसद के पिछले सत्र का जिक्र किया 83 दिन बीत चुके हैं उसके खत्म होने के बाद, और अभी भी अगला सत्र तय नहीं है। इस बीच, कई लोग विशेष सत्र बुलाने की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने विपक्ष की तरफ से चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सार्वजनिक मुहिम का भी ज़िक्र किया और रामलीला मैदान की 'वोट बचाओ' रैली के बारे में भी बताया। उनके मुताबिक, ये सारी बातें प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को काफी परेशान कर रही हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री पर संसद में न आने और खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस से बचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, अब वक्त है कि देश के सामने सीधे सवालों के जवाब दिए जाएं।
आरोपों पर बहस की बात रखते हुए, खरगे ने सरकार से चुनावी गड़बड़ियों पर चर्चा करने और विपक्ष की चुनौती स्वीकार करने की मांग की।
उनका कहना बिल्कुल साफ है सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी से काम नहीं चलेगा, चुनावी मुद्दों पर संसद में खुले तौर पर चर्चा और जवाबदेही जरूरी है।