राष्ट्रीय

Mangalyaan-2: अब मंगल की सतह पर उतरेगा भारत का ऑर्बिटर, जानें कैसा होगा ‘मार्स मिशन’

Mangalyaan-2: लाल ग्रह का वायुमंडल टटोलेगा भारत का दूसरा मंगल अभियान, भावी उड़ान : पहले जाएगा कम्यूनिकेशन ऑर्बिटरलाल ग्रह का वायुमंडल टटोलेगा भारत का दूसरा मंगल अभियान

less than 1 minute read

Mangalyaan-2: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) दूसरे मंगल अभियान की तैयारी कर रहा है। इसका नाम मार्स लैंडर मिशन (एमएलएम) होगा। मिशन से पहले इसरो मंगल ग्रह के चारों तरफ चक्कर लगाने वाला ऑर्बिटर भेजेगा। यह कम्यूनिकेशन रिले ऑर्बिटर (सीआरओ) होगा। इसके जरिए इसरो मंगल ग्रह पर उतरने वाले भारतीय स्पेसक्राफ्ट (लैंडर) के संपर्क में रहेगा।
इसरो के सूत्रों के मुताबिक कम्यूनिकेशन रिले ऑर्बिटर टेलीफोन एक्सचेंज की तरह काम करेगा। यह वीएनआइआर और आइआर कैमरा होगा, जो मंगल ग्रह के वायुमंडलीय डायनेमिक्स को समझने की कोशिश करेगा।

इसरो का यह ड्रीम प्रोजेक्ट 2031 में लॉन्च किए जाने की संभावना है। मार्स लैंडर मिशन को एलवीएम-3 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा। यह भारी रॉकेट बड़े स्पेसक्राफ्ट को अंतरिक्ष में पहुंचाने में सक्षम है। मार्स कम्यूनिकेशन रिले ऑर्बिटर को पीएसएलवी रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा। मंगल की सतह पर उतारने के लिए एमएलएम यान में सुपरसोनिक पैराशूट लगाया जाएगा। रोवर के लिए उसी तरह की स्काई क्रेन बनाई जाएगी, जैसी नासा ने क्यूरियोसिटी रोवर को उतारने के लिए बनाई थी। संभावित पेलोड्स में ग्राउंड पेनीट्रेटिंग रडार शामिल होगा, जो मंगल ग्रह की सतह का अध्ययन करेगा। इसके अलावा यूवी-टीआईआर स्पेक्ट्रोमीटर मंगल की सतह के खनिजों की मैपिंग करेगा।

2013 में पहले ही प्रयास में सफलता

मंगल ग्रह के लिए भारत का पहला मार्स ऑर्बिटर मिशन (एमओएम) 2013 में लॉन्च किया गया था। इसके साथ भारत मंगल की कक्षा में सफलतापूर्वक अंतरिक्ष यान भेजने वाला चौथा देश बन गया था। इससे पहले रूस, अमरीका और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने मंगल पर यान भेजे थे। भारत इस लिहाज से दुनिया का पहला देश है कि उसे पहले ही प्रयास में वहां यान भेजने में कामयाबी मिली थी।

Published on:
15 May 2024 08:26 am
Also Read
View All

अगली खबर