
केरल के अभयारण्यम (Abhayaranyam) एलीफेंट रिहैबिलिटेशन सेंटर में 18 महीने की हथिनी माया (Elephant Calf Maya) को आज, शुक्रवार, 6 नवंबर को एयरलिफ्ट करके गुजरात (Gujarat) के जामनगर (Jamnagar) स्थित वंतारा (Vantara) में भेजा गया है। वंतारा में माया का स्पेशल ट्रीटमेंट होगा। माया की तबीयत काफी खराब चल रही है और पिछले कुछ महीनों से वो खड़े भी नहीं हो पा रही है।
जानकारी के अनुसार माया ऑस्टियोपीनिया नाम की एक जेनेटिक हड्डी संबंधी बीमारी से पीड़ित है, जिसके कारण उसकी हड्डियाँ बहुत कमजोर हो गई हैं। माया कई फ्रैक्चर से जूझ रही है। इसी वजह से वो खड़े नहीं हो पा रही है और न ही चल पा रही है। जानकारी के अनुसार माया ऑस्टियोपीनिया नाम की एक जेनेटिक हड्डी संबंधी बीमारी से पीड़ित है, जिसके कारण उसकी हड्डियाँ बहुत कमजोर हो गई हैं। माया कई फ्रैक्चर से जूझ रही है। इसी वजह से वो खड़े नहीं हो पा रही है और न ही चल पा रही है।
2 जुलाई को माया की स्थिति काफी गंभीर हो गई, जब खेलते समय वो फिसलकर गिर गई और उसके दाहिने कंधे में चोट लग गई। स्प्लिंट लगाने, विशेष फिज़ियोथैरेपी, और कैल्शियम तथा विटामिन-डी कीके उच्च खुराक वाले सप्लीमेंट देने जैसे कई तरह के उपचारों के बावजूद माया की हड्डियों की स्थिति अभी सही नहीं है। इसी वजह से उसे वंतारा एयरलिफ्ट किया जा रहा है, जहाँ उसका स्पेशल ट्रीटमेंट होगा। बताया जा रहा है कि वंतारा की टीम बहुत कम समय के नोटिस पर अभयारण्यम पहुंच गई। उनके एनिमल डॉक्टरों ने वन अधिकारियों और अन्य डॉक्टरों के साथ मिलकर माया की जांच की। इस संयुक्त जांच के बाद दोनों टीमें इस बात पर सहमत हुईं कि उसके इलाज और ठीक होने के लिए वंतारा ले जाना ज़रूरी बताया।
माया का जन्म पिछले साल अप्रैल में हुआ था। इस साल 19 अप्रैल को केरल के मलयाट्टूर डिवीज़न के कप्रीक्काड इलाके में माया को उसकी माँ और झुंड के अन्य हाथियों ने नदी पार करते समय छोड़ दिया था। नवजात माया कमजोर तो थी ही और गंभीर रूप से डिहाइड्रेटेड थी और उसे माँ का पहला दूध (कोलोस्ट्रम) भी सही से नहीं मिला था।