Ministry of Finance: वित्त मंत्रालय के इस फैसले की वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रशंसा की है। उनका मानना है कि इस फैसले से अन्य सेक्टर की नीतियों पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
Ministry of Finance: भारतीय सिविल सेवा के इतिहास में यह पहली बार हुआ है, जब किसी प्रशासनिक अधिकारी ने अपना नाम और लिंग बदलने का अनुरोध किया और उसे स्वीकार कर लिया गया। भारत सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है, जो इतिहास में दर्ज होने जा रहा है। यह न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया के अन्य देशों के लिए भी मिसाल बनने वाला है। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने इंडियन रेवेन्यू सर्विस (IRS) की एक अधिकारी को लिंग परिवर्तन करने की मंजूरी दे दी है। इस लैंडमार्क डिसीजन के बाद मिस एम अनुसूया (M Anusuya) को भविष्य में मिस्टर एम अनुकाथिर सूर्या (M Anukathir Surya) के नाम से जाना जाएगा।
वित्त मंत्रालय के आदेश के अनुसार, हैदराबाद में सीमा शुल्क उत्पाद शुल्क और सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (CESTAT) के मुख्य आयुक्त (अधिकृत प्रतिनिधि) कार्यालय में संयुक्त आयुक्त एम अनुसूया ने मंत्रालय से अनुरोध किया था कि उनका नाम बदलकर एम अनुकाथिर सूर्या किया जाए और लिंग महिला से पुरुष किया जाए। इस याचिका पर फैसला लेते हुए वित्त मंत्रालय ने उन्हें यह मंजूरी दे दी है। सिविल सर्विस के इतिहास में ऐसे घटना पहली बार हुई है, जहां किसी अधिकारी को अपना नाम और लिंग परिवर्तन की आजादी दी गई है।
सीनियर IRS अधिकारियों ने सरकार के इस निर्णय की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा है कि इस फैसले के जरिए सरकार ने अपनी प्रगतिशील सोच का परिचय दिया है। इससे भारत में लैंगिक भेदभाव को खत्म करने में मदद मिलेगी। सरकार ने यह आदेश 9 जुलाई को जारी किया है। इसे वित्त मंत्रालय का ऐतिहासिक निर्णय बताया जा रहा है। आदेश के अनुसार, हैदराबाद में ज्वॉइंट कमिश्नर के पद पर तैनात एम अनुसूया को अपना नाम और लिंग बदलने की मंजूरी दी गई है। एम अनुसूया का जन्म 1988 में हुआ था। सभी सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें अब एम अनुकाथिर सूर्या के नाम से जाना जाएगा। अनुकाथिर सूर्या ने दिसंबर 2013 में चेन्नई में सहायक आयुक्त के रूप में अपना करियर शुरू किया था। उन्हें 2018 में डिप्टी कमिश्नर रैंक पर पदोन्नत किया गया। सूर्या ने पिछले साल हैदराबाद में अपनी वर्तमान पोस्टिंग ज्वाइन की है।
वित्त मंत्रालय ने इस आदेश में चीफ कमिश्नर, कस्टम्स, एक्साइज, सर्विस टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल और CBIC को भी सूचना भेजी है। इस आदेश पर सीनियर IRS अधिकारियों का कहना है कि वित्त मंत्रालय के इस फैसले से अन्य सेक्टर की नीतियों पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।