Chandrayaan-3 : ISRO आज दोपहर 2:35 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग करने जा रहा है। लॉन्चिंग के बाद अगर सब कुछ ठीक रहा, तो 23 अगस्त के चंद्रमा पर चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग की उम्मीद जताई जा रही है। इस मिशन को पूरा करने में टोटल खर्च 615 करोड़ आ रहा है, ऐसे में आई हम जानते हैं कि भारत का इस मिशन के पीछे आखिर मकसद क्या है? अगर यह मिशन सफल होता है तो हमारे देश को क्या हासिल होगा?
Chandrayaan-3 : आज दोपहर 2:35 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से की लॉन्चिंग होगी। तीसरे मून मिशन को ISRO LVM-3 रॉकेट से स्पेस में भेजेगा।इसकी लॉन्चिंग श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर पर स्थित दूसरे लॉन्च पैड से होगी। इस मिशन को पूरा करने में 615 करोड़ रूपये खर्च हो रहा है। यह भारत का तीसरा मून मिशन है। और इस बार भारत दूसरी बार यह प्रयास करेगा कि वह चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करा सके। साथ ही रोवर को चंद्रमा की सतह पर आसानी से चला सके। बता दें कि यह उपलब्धि अब तक सिर्फ तीन देशों के पास है। 2019 में चंद्रयान-2 की विफलता के बाद इस बाद वैज्ञानिकों का लक्ष्य है की उस कारण को ना दोहराया जाए। इस बार चंद्रयान-3 में ऑर्बिटर नहीं है, बल्कि एक प्रोपल्शन मॉड्यूल है। जो एक संचार उपग्रह की तरह काम करने के लिए बनाया गया है।
क्या है चंद्रयान-3 मिशन?
सबसे पहले जानिए चंद्रयान-3 है क्या ? यह मिशन इसरो के चंद्रयान-2 मिशन का फॉलो-अप मिशन है। जिसका साफ-साफ यह मतलब हुआ कि पिछली बार जो गलती हुई थी, उसे सुधारने और अपनी क्षमता विश्व के पटल पर दिखाने का मिशन। भारतीय वैज्ञानिक की काबिलियत क्या है, इसे साबित करने का मिशन।
इस बार चंद्रयान-3 मिशन में इस बार एक लैंडर और रोवर जा रहा है। लेकिन चंद्रयान-2 की तरह इस बार ऑर्बिटर नहीं जा रहा है। ऑर्बिटर का मतलब - जो चंद्रमा के चारों तरफ चक्कर लगाता है। लैंडर का अर्थ वो चार पैर वाला डिवाइस जो स्पेसएक्स के रॉकेट की तरह जमीन पर लैंड होगा। इसके अंदर रखा रहेगा रोवर। चलने वाले यंत्र को रोवर कहते हैं।
यह मिशन क्यों महत्वपूर्ण है
अब तक भारत ने किसी दूसरे ग्रह या उसके उपग्रह पर कोई रोवर लैंड नहीं करवाया है। चंद्रयान 3 हमारे इसी सपने को पूरा करेगा। ये मिशन ISRO के आने वाले कई दूसरे बड़े मिशन के लिए रास्तों को खोलेगा। इससे विश्व पटल पर भारत का साख अंतरिक्ष के मामले में और बढ़ेगा। भारत के भविष्य के लिए यह मिशन काफी महत्वपूर्ण है। बता दें कि अब तक अमरीका, रूस और चीन को चांद की सतह पर सॉफ्ट लैन्डिंग में सफलता मिली है।
सॉफ्ट लैन्डिंग का अर्थ होता है कि किसी भी सैटलाइट को किसी लैंडर से सुरक्षित सही स्थान पर उतारें और वो अपना काम सही रूप से करने लगे। चंद्रयान-2 को भी इसी तरह चन्द्रमा की सतह पर उतारना था, लेकिन आख़िरी क्षणों में यह संभव नहीं हो पाया। दुनिया भर के 50 प्रतिशत से भी कम मिशन हैं, जो सॉफ्ट लैंडिंग होने में कामयाब रहे हैं।
मिशन के कामयाब होने की कितनी गारंटी
अधिकारियों द्वारा इस मिशन के लिए एक बजट तय किया है। जिसके अनुसार पूरे मिशन की अंतिम लागत 615 करोड़ रुपये होने की घोषणा की गई। बजट का एक मुख्य हिस्सा चंद्रयान 3 के मॉडल के लिए था। यह मॉडल एक रोवर और लैंडर को चंद्रमा की सतह पर ले जाएगा। वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-3 के निर्माण में अपना 100 प्रतिशत दिया है। वैज्ञानिकों की कोशिश है कि पिछली गलती को दोहराई न जाए। इस बार हर कोई मिशन की सफलता को लेकर अस्वस्त है। लेकिन यह मिशन सफल हो ही जायेगा यह कोई नहीं कह सकता।
चंद्रयान-3 का मकसद क्या है?
चंद्रमा, पृथ्वी और यूनिवर्स के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करना इसका सबसे बड़ा मकसद है। अगर ये परीक्षण सफल हो जाता है तो भारत को दुनिया के सामने अपनी क्षमता दिखाने का मंच मिल जाएगा। इससे रॉकेट लॉन्च, स्पेस टेक्नोलॉजी, स्किल्ड मैनपावर की दिशा में बेहतरीन काम किए जा सकेंगे। दुनिया को सन्देश देने के लिए यह मिशन जरूरी है कि हम बिना किसी देश के सहयोग के भी हम इस मुकाम को हासिल कर सकते हैं। इसकी सॉफ्ट लैंडिंग के साथ ही भारत अमरीका, चीन और रूस के बाद चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश बन जाएगा।
इस मिशन के तीन मुख्य लक्ष्य
(1)चंद्रयान-3 के लैंडर की सुरक्षित और सॉफ्ट लैंडिंग का प्रदर्शन करना।
(2)रोवर को चांद की सतह पर चला कर दिखाना।
(3)लैंडर और रोवर की मदद से साइंटिफिक जांच-पड़ताल करना।
चंद्रमा पर जाकर ये चार काम करेगा चंद्रयान-3
1-मून पर पड़ने वाली रोशनी और रेडिएशन का अध्ययन करेगा।
2-मून की थर्मल कंडक्टिविटी और तापमान की स्टडी करेगा।
3-लैंडिंग साइट के आसपास भूकंपीय गतिविधियों की स्टडी करेगा।
4-प्लाज्मा के घनत्व और उसमें हुए बदलावों को स्टडी करेगा।