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फागण के इस माह में चढ़ा सियासी रंग, किसे मिले सत्ता यहां – किसके रंग में भंग

होली पर पढ़िये सियासी रंग में किसे सत्ता मिली और किसके रंग में भंग पड़ा।

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Mar 03, 2026
होली

दिल्ली में मजमा लगा, धरना कपड़ा-लेस। पकड़े नेता पुलिस ने, चिढ़ी युवा कंगरेस।।
चिढ़ी युवा कंगरेस, गजब मोदी ललकारे। बोले है अपमान, देश का जग में सारे।।
राहुल कूदे आय, कहैं €यूं उड़ी ये खिल्ली। आरोपों के रंग, सियासी 'हो ली दिल्ली'।।

उफनाया था शौक तब, करजा लियो करोड़। राजपाल के भाग में, आयो गड़बड़ मोड़।।
आयो गड़बड़ मोड़, दौड़ लागी तिहाड़ तक। बनते थे बलवान, ऊंट आयो पहाड़ तक।।
कुछ ही भये सहाय, बहुत ने बस ठुकराया। को कर सकत उपाय, करम का घट उफनाया।।

गाथा संतों की सुनो, ध्यान लगा अनिवार्य।
इत योगी सरकार है, उत शंकर आचार्य।।
उत शंकर आचार्य, दोऊ बढ़-चढक़र अ€खड़।
देखत सकल समाज, लड़त दो साधू फ€कड़।।
'शंकर' 'नाथ' भिड़ंत, भगत पकड़े हैं माथा।
दिखै आदि ना अंत, बढ़ी गफलत की गाथा।।

रोवत जेब गरीब की,
महंगाई का कूप।
सोना राजा सा बना,
चांदी रानी रूप।।
चांदी रानी रूप,
दाम में लागी आगी।
कैसे होय विवाह,
मात पित टेंशन जागी।।
जाके हाथ न कैश,
रात ना दिन में सोवत।
गोल्डवान हैरान,
स्वर्ण बिन कइयक रोवत।।

मोहन जन का ध्यान
धर, दियो पिटारा खोल।
बजट रपट को देखकर,
कमलनाथ झट बोल।।
कमलनाथ झट बोल,
बताशा है बातों का।
ना है खास हिसाब,
खरच आमद खातों का।
उधर भाजपा राग,
कहत खुश हैं सब लोगन।
नारी यूथ किसान,
रखा मन सबका मोहन।।

Published on:
03 Mar 2026 12:07 pm
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