
Neeraj Chaudhary: परिवार की जिम्मेदारियां, सरकारी नौकरी और दो बेटियों की परवरिश… इन सबके बीच एक ऐसा सपना भी है, जिसके लिए हौसले के साथ खुद पर भरोसा होना जरूरी है। सीकर मूल के जयपुर निवासी माउंटेनियर नीरज चौधरी अब दुनिया के सबसे दुर्गम इलाकों में से एक अंटार्कटिका में अकेले 1200 किलोमीटर का सफर तय करने जा रहे हैं। 10 नवंबर से शुरू होने वाले इस अभियान में वे हर्क्यूलिस इनलेट से साउथ पोल तक स्कीइंग करेंगे। करीब 50 से 60 दिन चलने वाले इस सफर में न कोई साथी होगा, न रास्ते में मदद और न ही खाने-पीने या ईंधन की कोई व्यवस्था। खास बात यह है कि इस पूरे अभियान का खर्च भी वे खुद उठा रहे हैं। उनके इस मिशन का नाम है 'प्रोजेक्ट साहस'।
महावीर स्कूल जयपुर से पढ़ाई करने के बाद नीरज ने एमबीएम जोधपुर से पढ़ाई और आइआइटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की। वर्तमान में वे जयपुर में जल संसाधन विभाग में एक्जीक्यूटिव इंजीनियर हैं। पत्नी और दो बेटियों वाले परिवार की जिम्मेदारियां भी उनके साथ हैं। नीरज कहते हैं कि वे परिवार और नौकरी छोड़कर ये अभियान नहीं कर रहे, बल्कि अपनी जिम्मेदारियों के साथ सपनों को भी जी रहे हैं। सेना के अधिकारियों और पर्वतारोहण संस्थानों से मिले प्रशिक्षण ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। उनका मानना है कि अपनी सोच और हौसलों को ऊंचा रखा जाए तो मुश्किल से मुश्किल लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है।
नीरज के लिए इस अभियान की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ 1200 किलोमीटर की दूरी तय करना नहीं, बल्कि हर दिन अपनी जरूरतों का इंतजाम खुद करना भी है। वे अपने साथ स्लेज में करीब 125 से 130 किलो सामान लेकर चलेंगे। इसमें दो महीने का राशन, करीब 15 लीटर ईंधन, टेंट, कपड़े और जरूरी उपकरण शामिल होंगे। रास्ते में बर्फ पिघलाकर पानी तैयार करेंगे। इसके बाद सूखे राशन में गर्म पानी मिलाकर भोजन बनाना होगा। रोजाना 8 से 12 घंटे स्कीइंग के दौरान शरीर को ऊर्जा देने के लिए करीब 6000 कैलोरी की जरूरत होगी। उन्होंने बताया कि पूरे प्रोजेक्ट का खर्च करीब 2 से 2.5 करोड़ रुपये उन्हें स्वयं ही वहन करना पड़ रहा है।
नीरज ने बातया कि वह पूरी तरह शाकाहारी हैं। ज्यादा ऊर्जा के लिए मांसाहारी भोजन जरूरी नहीं है। वे अपने साथ घर में बनी हाई कैलोरी मिठाइयां, सूखा राशन और चॉकलेट लेकर जाएंगे। नॉर्वे की खास चॉकलेट के 200 ग्राम से करीब 1000 कैलोरी मिलती हैं। ऐसे में चॉकलेट उनके लिए सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि ऊर्जा का भी अहम स्रोत होगी।
अंटार्कटिका में तापमान माइनस 40 डिग्री तक पहुंच सकता है। खुले बर्फीले मैदानों में हवाओं की रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है। बर्फ से ढके एक जैसे मैदानों में दिशा पहचानना भी बड़ी चुनौती होगी। तेज हवाओं और अत्यधिक ठंड से शरीर के अंगों में फ्रॉस्टबाइट का खतरा रहता है। साउथ पोल समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर भी स्थित है, जिससे सांस और शारीरिक क्षमता पर असर पड़ सकता है।
नीरज वर्ष 2021 में कोरोना से उबरने के बाद उन्होंने माउंट एवरेस्ट फतह किया। 2022 में नेपाल की 8163 मीटर ऊंची माउंट मनास्लू और उत्तराखंड की ब्लैक पीक पर तिरंगा फहराया। वर्ष 2024 में ग्रीनलैंड के पश्चिमी से पूर्वी तट तक करीब 600 किलोमीटर की दूरी 29 दिन में बिना किसी बाहरी मदद के स्कीइंग से पूरी की। ऐसा करने वाले वे पहले भारतीय हैं। इसी साल नॉर्वे के पहाड़ों में भी करीब 400 किलोमीटर का सफर अकेले और बिना सहायता के तय किया। जनवरी 2025 से भारत निर्वाचन आयोग ने उन्हें राजस्थान के लिये स्टेट आइकॉन नियुक्त किया हुआ है।