राष्ट्रीय

Nepal Flood: ‘लगा था सब खत्म हो गया, 5 फीट के अंतर से बची जान’, नेपाल बाढ़ से बचकर लौटीं शिवरंजनी ने सुनाई आपबीती

Nepal Flash Flood: नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड के बीच तिमुरे में फंसी तमिलनाडु की तीर्थयात्री शिवरंजनी सकुशल त्रिची लौट आई हैं। उन्होंने बताया कि जिस वक्त पानी का सैलाब उनकी गाड़ी की ओर बढ़ा, उन्हें लगा कि सब कुछ खत्म हो गया है। लेकिन गाड़ी एक मोड़ पर होने के कारण पानी का बहाव घूमकर निकल गया और महज 5 फीट के अंतर ने उनकी जान बचा ली।
2 min read
Aug 29, 2026
nepal flood survivors
नेपाल बाढ़ में फंसे तमिलनाडु के 21 लोग शनिवार को चेन्नई पहुंचे। (फोटो- वीडियो ग्रैब X@Vignesh_twitz)

Nepal Flood Survivors:नेपाल में फ्लैश फ्लड से मची तबाही के बीच फंसे तमिलनाडु के 21 नागरिक शनिवार को एक स्पेशल फ्लाइट से सुरक्षित घर लौट आए हैं। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गईं तिरुचिरापल्ली (त्रिची) की शिवरंजनी भी शामिल थीं, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गई थीं। शिवरंजनी ने उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए बताया कि कैसे सिर्फ पांच फीट के फासले ने उन्हें मौत से बचा लिया।

तिमुुरे में फंस गई थी गाड़ी

कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकलीं शिवरंजनी ने बताया कि यात्रा की शुरुआत तो बहुत अच्छे और उत्साह भरे माहौल में हुई थी, लेकिन स्याब्रूबेसी से केरुंग के रास्ते में मौसम और हालात अचानक बदल गए। चीनी सीमा और इमिग्रेशन पोस्ट से लगभग तीन किलोमीटर पहले तिमुुरे नाम की जगह पर उनकी गाड़ी भारी ट्रैफिक जाम और मलबे के बीच दूसरी गाड़ियों के साथ फंस गई। अचानक, पहाड़ों से पानी, कीचड़ और भारी पत्थरों का सैलाब नीचे की ओर बहने लगा। शिवरंजनी ने बताया कि गाड़ी तीन तरफ से घिर गई थी, जिससे वहां से निकलना लगभग नामुमकिन लग रहा था।

सिर्फ 5 फीट की दूरी ने बचाई जांच

शिवरंजनी ने बताया कि चारों तरफ पानी के तेज बहाव को देखकर उन्हें लगा कि सब कुछ खत्म हो गया है और यह उनकी जिंदगी का आखिरी दिन है। कोई और रास्ता न होने पर, यात्रियों ने हाथ जोड़कर भगवान शिव से प्रार्थना शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि उनकी गाड़ी सड़क के एक मोड़ पर खड़ी थी, जहां पानी का मुख्य बहाव दूसरी तरफ मुड़कर आगे निकल गया।

शिवरंजनी ने बताया कि अगर उनकी गाड़ी बस पांच फीट और आगे या पीछे होती, तो पानी का तेज बहाव उसे पूरी तरह बहा ले जाता। उस पांच फीट की दूरी ने सबकी जान बचा ली। इसके बाद, वे दाईं ओर का दरवाजा खोलकर गाड़ी से बाहर निकलने में कामयाब रहे।

साड़ी के सहारे पहाड़ चढ़कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचे

शिवरंजनी ने बताया कि गाड़ी से बाहर निकलने भर से ही खतरा टल नहीं गया था, बारिश और कीचड़ की वजह से फिसलन भरी पहाड़ी पर चढ़ना बहुत मुश्किल था। ऐसे में, साथ यात्रा कर रहे लोग फरिश्तों की तरह मदद के लिए आगे आए। शिवरंजनी ने बताया कि मायावरम के रत्नाकुमार और उनकी पत्नी पूंगोडी ने बहुत हिम्मत दिखाई। खुद सुरक्षित जगह पहुंचने के बाद रत्नाकुमार ने अपनी पत्नी की साड़ी का इस्तेमाल एक रस्सी की तरह किया, ताकि उन महिलाओं को ऊपर खींचा जा सके जो खुद ढलान पर नहीं चढ़ पा रही थीं। शिवरंजनी ने कहा कि संकट की उस घड़ी में यह दंपति उनके लिए किसी फरिश्ते से कम नहीं था।

वापस लौटने पर शिवरंजनी ने सरकार, बचाव दलों और उन सभी नागरिकों का शुक्रिया किया जिन्होंने उनकी सुरक्षा के लिए प्रार्थना की थी। उन्होंने बताया कि इस घटना के दौरान उनका असली पासपोर्ट और अन्य सामान खो गया था और उन्होंने प्रशासन से जरूरी औपचारिकताएं पूरी करके दस्तावेज उनके घर पहुंचाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि यह केवल भगवान भोलेनाथ की अपार कृपा और सरकार की तेज कार्रवाई के कारण ही संभव हो पाया कि वह आज अपने परिवार के पास सुरक्षित लौट सकीं।

Updated on:
29 Aug 2026 06:22 pm
Published on:
29 Aug 2026 06:21 pm