
नेपाल में फ्लैश फ्लड (फोटो-ANI)
Nepal Flood: नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री के विदेश नीति सलाहकार राजन भट्टराई ने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद सीमावर्ती इलाकों में चीन की निर्माण गतिविधियों पर उठ रहे सवालों पर प्रतिक्रिया दी है। चीन पर आरोप लगाने से बचते हुए उन्होंने कहा कि यह एक-दूसरे पर उंगली उठाने का समय नहीं है, बल्कि आपदा के असली कारणों को समझने और राहत कार्यों पर ध्यान देने की जरूरत है । उन्होंने इस संकट के समय तुरंत मदद का हाथ बढ़ाने के लिए भारत सरकार और भारतीय नागरिकों का आभार भी व्यक्त किया।
रसुवा में आई बाढ़ के लिए तिब्बत सीमा के पास चीन की निर्माण गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराने वाले दावों और आरोपों का जवाब देते हुए राजन भट्टराई ने समाचार एजेंसी PTI से कहा, "मुझे नहीं लगता कि यह दोषारोपण का समय है। यह पता लगाने का समय है कि असल में क्या हुआ था।"
भट्टराई ने बताया कि अब तक मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना बेहद ऊंचाई वाला सीमावर्ती क्षेत्र यानी 'नो मैन्स लैंड' हुई। भूस्खलन और हिमस्खलन 5,500 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर हुआ था। लेंडे नदी नेपाली क्षेत्र में आती है और उसी में बाढ़ आई, जिसने नीचे तक भारी तबाही मचाई। इस भौगोलिक तथ्य पर कोई विवाद नहीं है।
राहत और बचाव कार्यों में भारत की भूमिका की सराहना करते हुए राजन भट्टराई ने कहा कि भारत हमेशा एक सच्चे और करीबी पड़ोसी की तरह नेपाल के साथ खड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच करीबी और गहरी साझा विरासत को देखते हुए जब भी नेपाल पर कोई मुश्किल आई है, भारत हमेशा सबसे पहले मदद के लिए आगे आया है। भारत सरकार ने एक बार फिर बड़ी उदारता दिखाई है। इस मुश्किल समय में भारतीय समुदाय से मिली सहानुभूति और समर्थन के लिए हम आभारी हैं।
राजन भट्टराई ने आगे कहा कि भारत ने पहले भी 2015 के विनाशकारी भूकंप और कोविड-19 महामारी के दौरान नेपाल को हर संभव मदद दी थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस प्राकृतिक आपदा के बाद विस्थापित लोगों के पुनर्वास और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए भारत सरकार अपना सहयोग जारी रखेगी।
Updated on:
29 Aug 2026 02:50 pm
Published on:
29 Aug 2026 02:45 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
