
ISIS की बदली रणनीति से सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट (फोटो सोर्स- ANI)
ISIS Recruitment India: कभी विदेश जाकर सीरिया, इराक या अफगानिस्तान के युद्ध मैदानों में इस्लामिक स्टेट का हिस्सा बनने वाले भारतीय युवाओं का रुझान अब लगभग खत्म सा हो गया है। आंकड़े बताते हैं कि 2014 से 2023 के बीच जो युवक देश छोड़कर जा रहे थे, 2024 के बाद से उनकी संख्या शून्य के करीब पहुंच चुकी है। लेकिन सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह राहत की बात नहीं है, क्योंकि खतरा खत्म नहीं हुआ है, बल्कि उसका तरीका बदल गया है। भारतीय खुफिया एजेंसियों के विश्लेषण के अनुसार, विदेश में बैठे हैंडलर्स अब युवाओं को देश छोड़कर आने को नहीं कह रहे, बल्कि 'घर पर रहो और यहीं से गतिविधियों को अंजाम दो' का नया तरीका अपना रहे हैं।
सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि यह बदलाव किसी एक इलाके तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर में लागू किया जा रहा है। आईएस का मुख्य उद्देश्य अब पूरे देश में एक बड़ा ग्रुप बनाने की जगह अलग-अलग राज्यों में छोटे-छोटे लोकल नेटवर्क तैयार कर रहा है। भारत में इसका मुख्य फोकस दक्षिण भारत के राज्यों जैसे केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र पर है।
सुरक्षा तंत्र की सबसे बड़ी चिंता की वजह वह नया पैंतरा है, जिसमें अब 20 से 30 साल के युवाओं के अलावा स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाले किशोरों को निशाना बनाया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस उम्र में किशोरों का दिमाग आसानी से प्रभावित हो जाता है। जब तक वे 20-22 साल की उम्र तक पहुंचते हैं, तब तक उन्हें पूरी तरह से कट्टरपंथी सोच में ढाल दिया जाता है, जिससे वे भविष्य के लिए अत्यंत खतरनाक साबित हो सकते हैं।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की हालिया जांच में सामने आया है कि हैंडलर्स युवाओं से जुड़ने के लिए जूम लेक्चर, टेलीग्राम और व्हाट्सएप चैनलों का सहारा ले रहे हैं। पहली नजर में ये लेक्चर किसी सामान्य धार्मिक अध्ययन की तरह प्रतीत होते हैं, लेकिन जब गहराई से जांच की जाती है, तो पता चलता है कि ये कक्षाएं युवाओं के दिमाग में हिंसक जिहाद का जहर घोलने के लिए ली जा रही हैं।
गृह मंत्रालय और अमेरिकी विदेश विभाग के पुराने आंकड़ों के अनुसार, पहले भारत से लगभग 155 मामले आईएस से जुड़े पाए गए थे, जिनमें से कई लड़ाके केरल से अफगानिस्तान चले गए थे। हालांकि, भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने ‘ऑपरेशन चक्रव्यूह’ चलाकर ऑनलाइन गतिविधियों को समय रहते ट्रैक किया और सैकड़ों युवाओं को विदेश जाने से रोक लिया।
एजेंसियां अब इस नए ट्रेंड पर पैनी नजर रख रही हैं, जहां रणनीति 'घर छोड़ो' से बदलकर 'घर में रहकर नेटवर्क फैलाओ' हो चुकी है।
Updated on:
29 Aug 2026 02:19 pm
Published on:
29 Aug 2026 02:16 pm
