
Nepal Floods Tamil Nadu: नेपाल में बाढ़ के कारण फंसे तमिलनाडु के लोगों को सुरक्षित निकालने का अभियान जारी है। इस मामले में राज्य मंत्री राजमोहन ने रविवार को जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि नेपाल गए तमिलनाडु के 319 लोगों में से 219 लोगों का पता लगा लिया गया है और उनके सुरक्षित राज्य लौटने की उम्मीद है। इन लोगों के 31 अगस्त की रात तक चेन्नई पहुंचने की संभावना है। वहीं, 100 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के निर्देश पर मंत्रियों की एक टीम दिल्ली पहुंची। टीम ने केंद्र सरकार और नेपाल के अधिकारियों के साथ समन्वय कर राहत एवं बचाव अभियान की निगरानी की।
इस टीम में आधव अर्जुन, राजमोहन, थेन्नारसु और विनोद शामिल थे। टीम शनिवार देर रात चेन्नई लौट आई, जबकि प्रवासी तमिल कल्याण विभाग के मंत्री थेन्नारसु दिल्ली में रहकर बचाव अभियान की निगरानी कर रहे हैं।
चेन्नई एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में राजमोहन ने बताया कि तमिलनाडु सरकार ने दिल्ली स्थित तमिलनाडु हाउस में विशेष वॉर रूम स्थापित किया है। इसके जरिए विदेश मंत्रालय, भारत सरकार और नेपाल के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पिछले तीन दिनों से मंत्री दिल्ली में रहकर नेपाल में फंसे तमिलनाडु के लोगों को सुरक्षित निकालने के प्रयासों में जुटे थे। इस दौरान विदेश मंत्रालय के सचिव से भी मुलाकात कर राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
राजमोहन के अनुसार, प्रभावित परिवारों की मदद के लिए चार स्तरों पर व्यवस्थाएं की गई हैं। सरकार को बड़ी संख्या में फोन कॉल प्राप्त हुए हैं और लोगों से मिली जानकारी के आधार पर फंसे हुए यात्रियों का पता लगाने का काम किया जा रहा है।
राजमोहन ने बताया कि विभिन्न समूहों के जरिए कुल 319 लोग तमिलनाडु से नेपाल गए थे। इनमें से 219 लोगों के सुरक्षित होने की पुष्टि हो चुकी है। इन्हें अलग-अलग माध्यमों से भारत लाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि शुरुआत में 21 बचाए गए लोगों को दिल्ली लाया गया था। इसके अलावा कुंभकोणम स्थित एक एजेंसी के जरिए नेपाल गए 57 लोगों में से 21 को सुरक्षित चेन्नई पहुंचाया जा चुका है। इस समूह के बाकी 36 लोगों का पता लगाने के प्रयास जारी हैं।
राजमोहन ने कहा कि यह बड़े पैमाने की अंतरराष्ट्रीय आपदा है और बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने बताया कि बाढ़ और भूस्खलन के कारण लोगों का सामान और अन्य सामग्री घटनास्थल से सैकड़ों किलोमीटर दूर तक बह जाने की आशंका है।
मंत्री ने आगे बताया कि तमिलनाडु से गया एक अन्य समूह चीन सीमा के रास्ते काठमांडू पहुंचा था। इस समूह में करीब 150 लोग शामिल थे और उन्हें अलग-अलग उड़ानों के जरिए वापस लाया जा रहा है।
इसके अलावा 39 लोगों के सुरक्षित होने की भी पुष्टि हुई है। इनमें से 33 लोग 31 अगस्त की शाम तक कोयंबटूर पहुंचेंगे, जबकि छह लोग चेन्नई पहुंचेंगे।
वहीं, महादेवी तीर्थयात्रा के लिए नेपाल गए 49 लोगों के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। इन्हें फिलहाल लापता माना जा रहा है। सरकार इन समेत बाकी 100 लोगों का पता लगाने के लिए लगातार अभियान चला रही है।
राजमोहन ने बताया कि भारत और नेपाल की सेनाएं बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान में लगी हुई हैं। उन्होंने कहा कि 15 हजार से अधिक सैन्यकर्मी इस अभियान में शामिल हैं। हेलीकॉप्टरों के जरिए लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ-साथ मेडिकल टीमें भी राहत कार्य में जुटी हैं।
उन्होंने कहा कि नेपाल में बरामद कुछ शवों की अभी पहचान नहीं हो सकी है। इन अज्ञात शवों की पहचान के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।