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टोल प्लाज़ा जाने की ज़रूरत खत्म, आसपास रहने वालों के लिए डिजिटल हुई प्रक्रिया

Toll Pass: टोल प्लाज़ा के आसपास रहने वालों को अब टोल पास बनवाने के लिए टोल प्लाज़ा जाने की ज़रूरत नहीं होगी, क्योंकि उनके लिए यह प्रक्रिया अब डिजिटल हो गई है।
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Jul 22, 2026
Toll Plaza
टोल प्लाज़ा (File Photo)

एनएचएआई (NHAI) ने टोल प्लाज़ा (Toll Plaza) के आसपास रहने वाले लोगों के लिए लोकल टोल पास (Toll Pass) बनवाने की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल कर दी है। अब टोल प्लाज़ा से 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले पात्र निवासी राजमार्ग यात्रा ऐप के ज़रिए घर बैठे ही मासिक लोकल पास बनवा सकेंगे। इसके लिए टोल प्लाज़ा जाकर आवेदन करने या दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन कराने की जरूरत नहीं होगी। यह सुविधा अब शुरू कर दी गई है, जिससे कई लोगों का काम काफी आसान हो जाएगा।

मिनटों में पूरी हो जाएगी प्रक्रिया

नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह पूरी प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाएगी। यह सुविधा सिर्फ गैर-व्यावसायिक (निजी) वाहन मालिकों के लिए उपलब्ध होगी। पास जारी होने के बाद वाहन मालिक एक महीने की अवधि तक उस टोल प्लाज़ा से बिना किसी रुकावट के असीमित बार आवाजाही कर सकेंगे। निर्धारित मासिक शुल्क का भुगतान ऑनलाइन ही किया जाएगा। इसकी शुरुआत दिल्ली के मुंडका-बक्करवाला टोल प्लाज़ा (UER-II) से हुई है और आने वाले महीनों में देशभर के अन्य योग्य टोल प्लाज़ा पर इसे लागू किया जाएगा।

कैसे काम करता है डिजिटल टोल पास?

राजमार्ग यात्रा ऐप ऐप में सहमति-आधारित एकीकरण के जरिए DigiLocker, VAHAN और GIS-आधारित वेरिफिकेशन का इस्तेमाल होता है। इससे निवासी का पता, वाहन नंबर और लिंक्ड FASTag की जानकारी स्वतः प्राप्त हो जाती है। इससे मैनुअल दस्तावेजों की ज़रूरत खत्म हो गई है, पारदर्शिता बढ़ी है और गलत दावों पर अंकुश लगा है।

स्थानीय निवासियों को होगा फायदा

डिजिटल टोल पास बनने पर स्थानीय निवासियों को काफी फायदा होगा। डिजिटल टोल पास बनने के बाद लोगों को रोजाना काम, स्कूल या अन्य ज़रूरतों के लिए टोल प्लाज़ा पार करते समय हर बार टोल नहीं देना पड़ेगा। इससे काफी समय बचेगा और सुविधा भी होगी। एक बार में टोल पास बनवाना किफायती भी पड़ेगा।

बिना इंटरनेट हो सकेगा यूपीआई से भुगतान

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) जल्द ऑफलाइन 'यूपीआई टैप एंड पे' सुविधा शुरू करेगा। इसके ज़रिए इंटरनेट नहीं होने पर भी 2,000 रुपए तक का भुगतान किया जा सकेगा। यह सुविधा यूपीआई लाइट एक्स और एनएफसी तकनीक पर आधारित होगी। यूज़र को सिर्फ अपने एनएफसी समर्थित स्मार्टफोन को दुकानदार की पीओएस मशीन से टैप करना होगा। क्यूआर कोड स्कैन करने या इंटरनेट कीज़ ज़रूरत नहीं होगी। इसका सबसे ज़्यादा फायदा रेलवे, मेट्रो, सुरंग और कमजोर नेटवर्क वाले क्षेत्रों में मिलेगा। फिलहाल यह सुविधा परीक्षण और सर्टिफिकेशन के चरण में है। एनपीसीआई ने इसके लॉन्च की तारीख घोषित नहीं की है। परीक्षण पूरा होने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से बैंकों और यूपीआई ऐप्स पर शुरू किया जाएगा।

Updated on:
22 Jul 2026 03:50 am
Published on:
22 Jul 2026 03:47 am