जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने यह टिप्पणी पिछले सप्ताह एक महिला की ट्रांसफर याचिका पर सुनवाई के दौरान की। महिला ने अपने पति के मित्र की ओर से दायर मानहानि के मुकदमे को असम से गाजियाबाद स्थानांतरित करने की मांग की थी। उसका कहना था कि वह पहले से ही गाजियाबाद में पति से जुड़े कई मामलों का सामना कर रही है, इसलिए सभी मामलों की सुनवाई एक ही स्थान पर होनी चाहिए।
इस मामले में सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कि अदालत के सामने ऐसे कई मामले आ रहे हैं, जिनमें पत्नियाँ अपने पति के नियोक्ताओं को शिकायत पत्र भेज रही हैं। उन्होंने कहा, "तलाक लेना अलग बात है, लेकिन किसी व्यक्ति की रोजी-रोटी छीन लेना उससे भी ज़्यादा गंभीर है। उन्होंने कहा कि पति की नौकरी जाने से सबसे बड़ा नुकसान अंतत: उसी परिवार को होता है और भविष्य में पत्नी के मेंटेनेंस के दावे पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है।"