सुप्रीम कोर्ट ने वकील से निर्देश लेकर लौटने को कहा और मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को तय की। इस दिन सोनम के खुद सरेंडर करने या अदालत द्वारा जमानत रद्द करने के विषय में फैसला लिया जा सकता है। मेघालय सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि सोनम ने स्वयं सरेंडर किया था, उसे गिरफ्तारी के आधार बताए गए थे, उसने संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे और उसके भाई को गिरफ्तारी की सूचना भी दी गई थी। उनका कहना था कि दस्तावेज में सिर्फ टाइपिंग की तकनीकी त्रुटि हुई थी, जिससे मामले की वैधता प्रभावित नहीं होती और इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता।