
युवाओं में बढ़ रहा स्ट्रोक और ब्रेन फॉगिंग का खतरा (Representational Photo)
छत्तीसगढ़ में युवाओं के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है। 22 जुलाई को मनाए जाने वाले ‘विश्व ब्रेन दिवस’ के अवसर पर न्यूरोलॉजिस्ट और न्यूरो सर्जनों से बातचीत में खुलासा हुआ कि राज्य के 20 से 40 वर्ष के लगभग 30% (10 में से 3) युवा किसी न किसी प्रकार की ब्रेन संबंधी बीमारी से जूझ रहे हैं। पहले जहाँ स्ट्रोक, माइग्रेन और ब्रेन फॉगिंग जैसी समस्याएं बुज़ुर्गों या ज़्यादा उम्र के लोगों में देखी जाती थीं, वहीं अब 30 से 45 वर्ष की आयु के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
अत्यधिक स्क्रीन टाइम - रोजाना 8 से 10 घंटे मोबाइल या लैपटॉप पर बिताना।
अधूरी नींद - देर रात तक रील्स देखना और 6 घंटे से कम सोना।
लाइफस्टाइल का तनाव - नौकरी, ईएमआई और सोशल मीडिया।
असंतुलित खानपान - जंक फूड का अत्यधिक सेवन, पानी कम पीना
नशे की लत - शराब, सिगरेट, कैफीन और एनर्जी ड्रिंक्स जैसी चीज़ों का सेवन।
20-20-20 नियम अपनाएं - हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें।
नींद का समय तय करें - रात 11 बजे से सुबह 7 बजे तक की नियमित नींद लें।
भरपूर पानी और सही डाइट - कम से कम 3 लीटर पानी का सेवन करें और नाश्ता न छोड़े।
तनाव प्रबंधन - सप्ताह में 3 दिन 30 मिनट व्यायाम, मेडिटेशन या दोस्तों से बात करें।
खुद से दवा न लें - डॉक्टर की सलाह के बिना मेडिकल स्टोर से दवा लेने से बचें।
सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अभिजीत कोहट का कहना है कि युवाओं में स्ट्रोक और ब्रेन फॉगिंग के मामले तेज़ी से बढ़ना एक बड़ा अलर्ट है। इसका सबसे बड़ा कारण खराब लाइफस्टाइल, तनाव और नशा है। अगर समय रहते आदतों में सुधार नहीं किया गया तो यह समस्या और ज़्यादा गंभीर रूप ले सकती है। सीनियर न्यूरो सर्जन डॉ. लवलेश राठौर का कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं में सिर की गंभीर चोट (हेड इंजरी) के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। शराब पीकर गाड़ी चलाने से ब्रेन का फोकस घटता है। बिना हेलमेट बाइक चलाने से होने वाली ब्रेन इंजरी को ठीक होने में काफी लंबा समय लगता है।
Updated on:
22 Jul 2026 01:37 am
Published on:
22 Jul 2026 01:31 am
