लोकसभा में आज स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश हो गया है। इस अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के लिए 10 घंटे आवंटित किए गए हैं।
लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश हो गया है। संसद में 50 से ज्यादा सांसदों ने ओम बिरला को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया। इसके बाद पीठाशीन अधिकारी ने प्रस्ताव पेश करने की इजाजत दी। यह प्रस्ताव किशनगंज(बिहार) से कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने पेश किया। इस प्रस्ताव में 118 से अधिक विपक्षी सांसदों ने समर्थन दिया है। इस प्रस्ताव पर 50 से ज्यादा सांसदों ने स्पीकर के पक्ष में वोट किया। अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में चर्चा के दौरान ओम बिरला की जगह BJP सांसद जगदंबिका पाल ने अध्यक्षता की।
विपक्ष की तरफ से चर्चा की शुरूआत कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने की। इस दौरान गोगोई ने लोकसभा स्पीकर पर भेदभाव का आरोप लगाया। उन्होंने बजट सत्र में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को 20 से अधिक बार रोके जाने का जिक्र किया। गौरव गोगोई ने कहा- राहुल गांधी को बार-बार रोका गया।
रूलिंग बुक दिखाई गई, लेकिन सत्ता पक्ष के सांसदों को बैन किताबें दिखाने पर कुछ नहीं कहा गया। उन्होंने आगे कहा कि 2 फरवरी को राहुल गांधी के भाषण के दौरान उन्हें सबूत मांगकर रोका गया। सदन की कार्यवाही में विपक्ष को चुप कराने के लिए माइक्रोफोन को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। यह अविश्वास प्रस्ताव स्पीकर को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि संसद की गरिमा और संविधान बचाने के लिए है।
सदन की कार्यवाही में संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा- इन लोगों ने पहले आरोप लगाया कि LoP को बोलने नहीं दिया जाता है। मैं कहता हूं 15वीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष केवल 2 बार बोले। जब सेशन चलता है तो वह विदेश चले जाते हैं। नेता प्रतिपक्ष अपनी बात बोलकर सदन से भाग जाते हैं। वह किसी और की बात नहीं सुनते हैं, फिर कहते हैं कि मुझे बोलने नहीं दिया जाता है।
रिजिजू ने कहा- पहली बार मैंने ऐसा दृश्य देखा कि नेता प्रतिपक्ष PM को गले लगा रहा है। अपनी सीट पर बैठकर अपने सांसद को आंख मारता है। जैसा लीडर है तो बाकी के सांसद भी वैसे ही होंगे। मेंबर चेयर को यार कहते हैं, फिर कहतें हैं कि इसमें गलत क्या है। बता दें कि कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने चेयर मेंबर को को यार कहा था। प्रियंका को LOP बनाते तो कुछ अच्छा होता। जो अच्छा व्यवहार करे तो उसकी सराहना करनी चाहिए।
सदन की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस ने स्पीकर की गैर-मौजूदगी में डिप्टी स्पीकर नियुक्त न करने पर सवाल उठाए। कांग्रेस सांसदों ने कहा कि चेयर पर बैठे जगदंबिका पाल कैसे कार्यवाही चला सकते हैं? कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि देश का नेतृत्व कमकोर और बुजदिल है। डिप्टी स्पीकर का पद विपक्ष को देने की परंपरा रही है। 16वीं लोकसभा में NDA में शामिल रहे अन्नाद्रमुक के थंबीदुरई को यह पद दिया गया था, जबकि 17वीं और 18वीं लोकसभा में किसी को भी डिप्टी स्पीकर नहीं बनाया गया।
सदन में AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने नियमों का हवाला देते हुए पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया और कहा कि जब स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा हो रही हो, तब स्पीकर को कार्यवाही की अध्यक्षता करने का अधिकार नहीं होता है। अभी तक डिप्टी स्पीकर नियुक्त नहीं किया गया है और जो व्यक्ति चेयर पर बैठे हैं, वह स्पीकर की मंजूरी से ही आए हैं। इसलिए वे इस प्रस्ताव पर कार्यवाही नहीं चला सकते हैं।
ओवैसी ने मांग की कि बहस शुरू करने से पहले सदन की सहमति से तय किया जाए कि कार्यवाही की अध्यक्षता कौन करेगा? ओवैसी के बयान पर निशिकांत दुबे ने हस्तक्षेप किया। निशिकांत ने कहा कि नियमों के अनुसार चेयर पर बैठा कोई भी व्यक्ति स्पीकर जैसी शक्तियां रखता है। वह कार्यवाही की अध्यक्षता कर सकता है। किरेन रिजिजू ने भी इस बात का समर्थन किया।