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West Bengal: ममता का भाषण रुकते ही भवानीपुर बन गया रणक्षेत्र, 100 मीटर की दूरी और 2 रैलियों में कैसे शुरू हुआ बवाल?

West Bengal Chunav: भवानीपुर में ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी की रैलियों के दौरान बड़ा बवालहुआ। 100 मीटर की दूरी पर समर्थक आमने-सामने हुए। चुनाव से पहले कोलकाता में सियासी तनाव बढ़ गया है। आखिरकार पुलिस को संभालना पड़ा मोर्चा।

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ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी। (फोटो- ANI)

पश्चिम बंगाल की राजनीति का सबसे गर्म मुकाबला अब खुलकर सड़कों पर दिखने लगा है। कोलकाता के भवानीपुर (Chaos In Bhabanipur) में उस समय तनाव चरम पर पहुंच गया, जब ममता बनर्जी (Mamata banerjee Rally) और सुवेंदु अधिकारी की रैलियां महज 100 मीटर की दूरी पर हो रही थीं। दोनों पक्षों के समर्थक आमने-सामने आ गए और हालात बिगड़ते देख पुलिस को तुरंत दखल देना पड़ा।

भाषण के बीच मंच छोड़कर चली गईं ममता

पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब ममता बनर्जी भवानीपुर में एक जनसभा को संबोधित कर रही थीं। आरोप है कि पास में हो रही भाजपा की रैली में तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजाए जा रहे थे, जिससे उनका भाषण बाधित हो रहा था।

स्थिति से नाराज होकर ममता ने अपना भाषण बीच में ही रोक दिया और समर्थकों से माफी मांगते हुए मंच छोड़ दिया। इस कदम ने उनके कार्यकर्ताओं को और भड़का दिया।

आमने-सामने आए कार्यकर्ता

ममता के मंच से उतरते ही टीएमसी कार्यकर्ता भाजपा की रैली की ओर बढ़ गए। वहां पहले से मौजूद भाजपा समर्थकों से उनका सामना हो गया। दोनों तरफ से 'जय बांग्ला' और 'जय श्री राम' के नारे गूंजने लगे। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि टकराव का खतरा बढ़ गया।

हालात बिगड़ते देख पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स ने तुरंत मोर्चा संभाला। सुरक्षाबलों ने दोनों पक्षों के बीच मानव श्रृंखला बनाकर उन्हें अलग किया और किसी बड़े हिंसक टकराव को टाल दिया। इस दौरान पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। अब भवानीपुर में शटडाउन की स्थिति है।

सुवेंदु अधिकारी ने क्या कहा?

घटना के कुछ देर बाद सुवेंदु अधिकारी अपनी रैली में पहुंचे और टीएमसी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह 'जंगलराज' का उदाहरण है और उनकी पार्टी इसका जवाब दे रही है। उन्होंने दावा किया कि इस बार मुकाबला एकतरफा नहीं होगा और बंगाल में बदलाव तय है।

भवानीपुर सीट क्यों है इतनी अहम?

भवानीपुर सिर्फ एक विधानसभा सीट नहीं, बल्कि कोलकाता की राजनीति का केंद्र मानी जाती है। ममता बनर्जी 2011 से इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और इसे अपनी मजबूत पकड़ वाला क्षेत्र मानती हैं। वहीं, भाजपा ने इस सीट को 2026 चुनाव में अपनी सबसे बड़ी चुनौती बना रखा है।

भवानीपुर की खासियत इसकी विविध आबादी है। यहां बंगाली, गुजराती, मारवाड़ी और सिख समुदाय बड़ी संख्या में रहते हैं। यही वजह है कि हर पार्टी यहां खास रणनीति के साथ चुनाव लड़ रही है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

29 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले चुनाव आयोग ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है। ड्रोन निगरानी, अतिरिक्त पुलिस बल और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकी जा सके।

पहले चरण के मतदान में पश्चिम बंगाल में 90 प्रतिशत से ज्यादा वोटिंग हुई है, जो चुनावी उत्साह को दिखाती है। अब सबकी नजरें भवानीपुर पर टिकी हैं, जहां यह सीधा मुकाबला चुनाव का रुख तय कर सकता है।

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