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AAP बनाने के चक्कर में नौ किलो कम हो गया था अरविंद केजरीवाल का वजन, अन्ना ने पानी तक नहीं पूछा था

राघव चड्ढा ने अरविंद केजरीवाल को सबसे बड़ा राजनीतिक झटका दिया है। AAP को छोड़ते हुए चड्ढा ने अब बीजेपी का दामन थाम लिया है।

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भारत

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Vijay Kumar Jha

Apr 26, 2026

Arvind Kejriwal

Arvind Kejriwal(AI Image-ChatGpt)

अरविंद केजरीवाल की बनाई आम आदमी पार्टी (AAP - आप) ने अपने 14वें साल में जो झटका खाया है, वह केजरीवाल को अंदर से तोड़ देने के लिए काफी है। AAP का जन्म 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' (आईएसी) के बैनर तले किए गए 'अन्ना आंदोलन' के गर्भ से हुआ है। इसे जन्म देने में अरविंद केजरीवाल को खूब पापड़ बेलने पड़े और आंदोलन का चेहरा बने अन्ना हज़ारे की नाराजगी भी झेलनी पड़ी।

उन दिनों अरविंद केजरीवाल की सादगी भी गज़ब की थी। आप की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रहे और काफी पहले पार्टी छोड़ चुके मयंक गांधी ने एक-दो वाकये का जिक्र किया है, जिनसे केजरीवाल की सादगी का अंदाज लगाया जा सकता है।

अपनी किताब 'आप एंड डाउन' (AAP & Down) में मयंक ने एक वाकया याद करते हुए लिखा है- एक बार आधी रात के बाद मैं प्रशांत भूषण के मयूर विहार (दिल्ली) वाले घर पर पहुंचा। इस घर का इस्तेमाल कार्यकर्ता किया करते थे। मैंने देखा अरविंद जमीन पर एक पतली सी चादर पर सो रहे थे। वह जगे और मेरा हाल-चाल पूछा। मैंने पूछा- मैं कहां सोऊं? उन्होंने चादर के एक तरफ हाथ थपथपाई और कहा-यहां सो जाओ। मैं करवटें बदलता रहा, वह आराम से सो रहे थे।

मयंक ने पार्टी बनाने से पहले की कश्मकश के बारे में भी लिखा है। उन्होंने बताया है कि पार्टी बनाने के लिए अन्ना को मनाने के लिए अरविंद केजरीवाल ने क्या-क्या जतन किए थे।

अरविंद के मुताबिक जिंदल फार्म्स के सीताराम जिंदल ने अन्ना हज़ारे को समझा दिया था कि पार्टी नहीं बनानी चाहिए। जिंदल आरएसएस समर्थक थे। अन्ना फार्म्स में इलाज के लिए गए थे। वहां जिंदल ने अन्ना से कहा कि अरविंद को रोकें। अन्ना ने मीडिया के सामने बयान दे दिया कि अरविंद को पार्टी नहीं बनानी चाहिए।

अरविंद मन बना चुके थे, लेकिन वह अन्ना की इजाजत से आगे बढ़ना चाहते थे। वह और प्रशांत भूषण अन्ना के पास पहुंचे। अन्ना ने सीधा सवाल किया- क्या चाहते हो? अरविंद बोले, 'अन्ना जी, हम दिल्ली से आ रहे हैं, कम से कम पानी तो पिलवा दीजिए।'

अन्ना का मिजाज गरम था। अरविंद ने अपनी बात रखनी शुरू की और कहा- आप हमेशा कहते हैं कि जनता की बात सुननी चाहिए। । सभी ओपिनियन पोल में पार्टी बनाने के पक्ष में राय आ रही है। टीवी के ओपिनियन पोल्स में भी।

अन्ना ने जवाब दिया- टीवी के ओपिनियन पोल्स की वैल्यू ही क्या है? अगर असली जनमत जानना चाहते हो तो सही तरीके से पोल करो।

केजरीवाल ने फेसबुक, एक्स (तब ट्विटर), एसएमएस से देश भर में ओपिनियन पोल करवाया। सात लाख लोगों में से 76 फीसदी ने पार्टी बनाने के पक्ष में राय दी। लेकिन, अन्ना ने अपना मन नहीं बदला।

उन्होंने केजरीवाल से कहा, 'जानकारी का अभाव रखने वाले लोगों के बीच रायशुमारी का क्या मतलब? कुछ नामी-गिरामी लोगों की राय जानो। ऐसे लोग अपने अध्ययन-अनुभव के आधार पर बताएंगे कि पार्टी बनानी चाहिए या नहीं।'

अब केजरीवाल की टीम ने अन्ना के साथ विचार-विमर्श के बाद 42 लोगों की मीटिंग बुलाई। 19 सितंबर, 2012 को दिल्ली में यह बैठक हुई। इसमें जनरल वीके सिंह, संतोष हेगड़े, किरण बेदी, योगेंद्र यादव जैसे लोग शामिल थे। अन्ना और केजरीवाल तो थे ही। बेदी, जनरल सिंह और हेगड़े सहित केवल छह लोगों ने राजनीतिक पार्टी बनाने के खिलाफ राय दी।

इसके बाद इसी मीटिंग में पार्टी बनाने का प्रस्ताव पढ़ा गया। अन्ना हज़ारे ने इस प्रस्ताव से पूरी तरह असहमति जाहिर की और कमरे से बाहर निकल गए। उन्होंने कहा कि वह न केवल राजनीतिक दल बनाने के खिलाफ हैं, बल्कि इसके लिए अपना नाम और तस्वीर इस्तेमाल किए जाने के हक में भी नहीं हैं।

मयंक लिखते हैं- मुझे याद है जब अरविंद ने कहा था कि उन दिनों तनाव और अन्ना के बार-बार बदलते रुख व मूड से निपटने के चक्कर में उनका वजन नौ किलो कम हो गया था और वह नींद की गोलियां तक लेने लगे थे।

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