भारत में महिला कैदियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, पुरुषों की तुलना में दोगुनी दर से। 2000 से 2023 तक महिला कैदियों में 256% की वृद्धि हुई, जबकि पुरुषों में 160% की वृद्धि हुई।
भारत की जेलों में बंद महिला कैदियों की संख्या को लेकर एक चिंताजनक राष्ट्रीय रुझान सामने आया है। हाल ही में जारी 'इंस्टीट्यूट फॉर क्राइम एंड जस्टिस पॉलिसी रिसर्च' (आइसीपीआर) रिपोर्ट 'वर्ल्ड फीमेल इम्प्रिजनमेंट लिस्ट' के अनुसार, पिछले दो दशकों में भारतीय जेलों में महिलाओं की संख्या, पुरुषों और सामान्य जनसंख्या की वृद्धि दर के मुकाबले दोगुनी तेजी से बढ़ी है।
रिपोर्ट के अनुसार, साल 2000 से 2022 के बीच भारतीय जेलों में बंद महिला कैदियों (विचाराधीन और सजायाफ्ता दोनों) की संख्या 9,089 से बढ़कर 23,772 हो गई है।
यह 162% की वृद्धि है, जबकि इसी अवधि के दौरान भारत की कुल जनसंख्या में लगभग 30% का इजाफा हुआ और पुरुष कैदियों की संख्या 310310 से बढ़कर 549351 हुई, जो 77 फीसदी बढ़ोतरी है।
महिला कैदियों की इस बढ़ती संख्या के मामले में भारत अब वैश्विक स्तर पर अमरीका, चीन, ब्राजील, रूस और थाईलैंड के बाद छठे स्थान पर पहुंच गया है।
हालांकि, भारत की जेलों में बंद कुल 5.7 लाख कैदियों में महिलाओं की हिस्सेदारी मात्र 4% है, लेकिन उनकी बढ़ती वृद्धि दर ने चिंता खड़ी कर दी है।
रिपोर्ट के अनुसार, शहरीकरण के साथ अपराधों के स्वरूप में बदलाव आया है। अब महिलाएं संगठित अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी (ड्रग्स), धोखाधड़ी और मानव तस्करी जैसे मामलों में अधिक देखी जा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की सार्वजनिक सक्रियता बढ़ने से यह ट्रेंड बढ़ा है।
रिपोर्ट के अनुसार, न्यायिक रुझान में भी बदलाव देखा गया है। अब गैर-हिंसक अपराधों (जैसे सेक्स वर्क या छोटे अपराध) में भी अदालतें महिलाओं को जमानत देने में कम उदारता दिखा रही हैं।
सामाजिक कलंक के कारण इन महिलाओं को अक्सर परिवार का साथ नहीं मिलता, जिससे उनके लिए कानूनी लड़ाई और जमानत की प्रक्रिया और कठिन हो जाती है।
साथ ही उचित कानूनी सहायता के अभाव में गरीबी से जुड़े छोटे अपराधों (जैसे पॉकेटमारी या छोटी चोरी) के लिए महिलाएं महीनों जेल में बिता रही हैं।
हाल के वर्षों में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों, विशेषकर बांग्लादेशी मूल की महिलाओं के खिलाफ सघन अभियान के कारण भी जेलों में महिला कैदियों की संख्या बढ़ी है। एक अनुमान के अऩुसार, पश्चिम बंगाल की जेलों में 358 बांग्लादेशी महिलाएं कैद में हैं।
महिला कैदियों की बढ़ती संख्या ने जेल प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है। अधिकांश जेलों में महिलाओं के लिए बुनियादी ढांचा अपर्याप्त है।
'द लांसेट साइकियाट्री' के एक अध्ययन के अनुसार, जेलों में अलगाव और बच्चों से दूरी के कारण महिलाओं में मानसिक तनाव और आत्महत्या की दर बढ़ी है। जेलों के भीतर महिला वार्डों में भीड़भाड़, काउंसलर और चिकित्सा सेवाओं की कमी एक गंभीर समस्या बनी हुई है।
देश महिला कैदियों की संख्या
अमेरिका- 1,74,607
चीन- 1,45,000
ब्राजील- 50,441
रूस- 39,153
थाईलैंड- 33,057
भारत- 23,772
फिलीपींस- 17121
तुर्की- 16,581
वियतनाम- 15,152
मेक्सिको- 13,841