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सावधान! स्मार्टफोन बन रहा है ‘साइलेंट किलर’, कहीं आपका बच्चा अगला शिकार तो नहीं?

कर्नाटक में पिछले तीन सालों में ऑनलाइन गेमिंग एडिक्शन से जुड़ी 18 मौतें दर्ज की गई, जिनमें कुछ लोगों ने गेमिंग फीचर खरीदने के दबाव और मानसिक तनाव के कारण जीवन समाप्त किया।
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Feb 12, 2026
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गाजियाबाद में तीन किशोर बहनों की खुदकुशी के बाद उत्तर प्रदेश के मेरठ में गेम खेलते हुए 22 वर्षीय मोहम्मद कैफ की ब्रेन-हेमरेज से मौत चेता रही है कि ऑनलाइन गेमिंग अब केवल समय की बर्बादी ही नहीं रहा बल्कि एक 'न्यूरोलॉजिकल टाइम बम' बन गया है। भारत में भी निम्हांस और अन्य संस्थानों में देशभर से गेमिंग और इंटरनेट लत के मामलों में लगातार तेजी आ रही है।

अकेले कर्नाटक में पिछले तीन सालों में ऑनलाइन गेमिंग एडिक्शन से जुड़ी 18 मौतें दर्ज की गई, जिनमें कुछ लोगों ने गेमिंग फीचर खरीदने के दबाव और मानसिक तनाव के कारण जीवन समाप्त किया। पुणे में एक 15 साल के बच्चे ने कुछ दिनों तक गेमिंग के बाद 'लॉगआउट' लिखकर आत्महत्या कर ली। विशेषज्ञों के अनुसार, गेमिंग के दौरान तीव्र उत्तेजना में तनाव पैदा करने वाले हार्मोन बढ़ते हैं।

कैसे करते हैं दिमाग को 'हाइजैक'?

डोपामीन हाइवे: इन गेम में 'इंटरमिटेंट वेरिएबल रिवॉर्ड्स' का उपयोग होता है। हर जीत पर दिमाग में 'डोपामीन' हार्मोन रिलीज होता है। धीरे-धीरे दिमाग को ऐसी लत लगती है कि सामान्य जीवन उसे 'उबाऊ' लगने लगता है।

प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स पर प्रहार: अत्यधिक गेमिंग दिमाग के उस हिस्से को कमजोर कर देती है जो निर्णय लेने और आवेग को नियंत्रित करता है। यही कारण है कि युवा आर्थिक नुकसान या सेहत बिगड़ने के बावजूद फोन नहीं छोड़ पाते।

लत को ऐसे पहचानें

  • घंटों गेम खेलना और पूछने पर कम समय बताना।
  • गेम न खेलने मिलने पर अत्यधिक चिड़चिड़ापन या गुस्सा।
  • गेमिंग फीचर्स खरीदने के लिए घर में चोरी करना या पैसे मांगना।
  • सामाजिक कार्यक्रमों और पढ़ाई से पूरी तरह दूरी बना लेना।

दिमाग की 'सर्विसिंग' कैसे करें?

  • 20-20-20 नियम : हर 20 मिनट के स्क्रीन टाइम के बाद, 20 फीट दूर देखें और 20 सेकंड का ब्रेक लें।
  • ग्रेस्केल मोड : फोन की सेटिंग्स में जाकर 'कलर' को हटा दें। बिना रंगों के स्क्रीन दिमाग को आकर्षित नहीं करती।
  • डिजिटल फास्टिंग : सोने से 90 मिनट पहले सभी डिजिटल उपकरणों को दूसरे कमरे में रख दें।
  • डोपा-मैपिंग : असली दुनिया की उपलब्धियों जैसे दौड़ना, तैरना या संगीत आदि से बदलें।

सुरक्षा के लिए बनाएं नियम

क्या करें

  • गेमिंग के लिए 'ब्रेक अलार्म' लगाएं।
  • इयरफोन के बजाय स्पीकर का प्रयोग करें।
  • गेमिंग के दौरान पानी पीते रहें।
  • चिड़चिड़ापन होने पर डॉक्टर से मिलें।

क्या न करें

  • कभी भी अंधेरे कमरे में गेम न खेलें।
  • हारने पर 'बदला' लेने के लिए दोबारा न खेलें।
  • फोन चार्जिंग पर लगाकर गेम कभी न खेलें।
  • गेम को अपनी 'पहचान' न बनाएं।
Updated on:
12 Feb 2026 07:07 am
Published on:
12 Feb 2026 07:06 am