मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर में चेनाब नदी पर दुलहस्ती-2 जलविद्युत परियोजना को मंजूरी दी है। 3200 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस परियोजना से 260 मेगावॉट अतिरिक्त बिजली उत्पादन होगा।
पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत ने अप्रैल में ही पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। भारत ने पाक के आतंकी मंसूबों को नाकाम करने के इरादे से यह फैसला लिया था। अब एक और कदम मोदी सरकार ने बढ़ाया है। जम्मू-कश्मीर में चेनाब नदी पर दुलहस्ती जल विद्युत परियोजना के दूसरे चरण को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने स्वीकृति दे दी है।
3200 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के पूरा होने पर दो यूनिटों से कुल 260 मेगावाॅट बिजली उत्पादन होगा। इस परियोजना को लेकर एनएचपीसी और जम्मू-कश्मीर सरकार के बीच जनवरी 2021 में समझौता हुआ था। इसका निर्माण छह वर्षों में पूरा होने की उम्मीद है।
दुलहस्ती परियोजना के पहले चरण को सिंधु जल समझौते की शर्तों के कारण रन ऑफ द रिवर की तरह तैयार किया गया था। इसका मतलब है नदी के प्रवाह में कोई बाधा डाले बिना जल विद्युत का उत्पादन करना। लेकिन, किश्तवाड़ में इस परियोजना के दूसरे चरण को मंजूरी देने से पहले समिति ने यह दर्ज किया कि सिंधु जल संधि 23 अप्रैल 2025 को प्रभावी रूप से निलंबित है। दुलहस्ती परियोजना का दूसरा चरण 390 मेगावाॅट क्षमता के पहले चरण का ही विस्तार है। नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कारपोरेशन लिमिटेड (एनएचपीसी) 2007 से इसका संचालन कर रही है।
सिंधु जल समझौते के तहत सिंधु घाटी की तीन नदियों का पानी भारत और तीन नदियों का पानी पाकिस्तान इस्तेमाल करता था। सिंधु, झेलम और चेनाब नदियों का पानी पाकिस्तान को जाता है। जिस पर दुलहस्ती परियोजना के दूसरे चरण को मंजूरी दी गई है। रणनीतिक रूप से भी यह भारत का बड़ा निर्णय माना जा रहा है।
जल समझौता निलंबित होने के बाद जम्मू-कश्मीर में भारत कई जलविद्युत परियोजनाओं पर काम तेजी से आगे बढ़ा रहा है। इनमें सावलकोट, रतले, बुरसर, पकल दुल, क्वार, किरू और किर्थाई एक व दो योजनाएं प्रमुख हैं। चेनाब नदी बेसिन में तीन जलविद्युत परियोजनाएं संचालित हो रही हैं जबकि जबकि तीन परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।