पप्पू यादव ने संसद में महिला आरक्षण बिल का विरोध करते हुए नेताओं पर गंभीर और विवादित आरोप लगाए। उन्होंने आरक्षण में अलग कोटा की मांग के साथ सामाजिक न्याय और महिला शोषण पर चिंता जताई।
पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान बेहद कड़ा और विवादित रुख अपनाया। अपने भाषण में उन्होंने न सिर्फ बिल का विरोध किया, बल्कि राजनीतिक वर्ग पर गंभीर नैतिक सवाल भी खड़े किए।
पप्पू यादव ने सांसदों और नेताओं की छवि पर सीधा हमला करते हुए चौंकाने वाले दावे किए। उन्होंने कहा कि देश के 755 सांसदों पर यौन शोषण के आरोप हैं, जिनमें से 155 मामलों में चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में यौन शोषण के मामलों में सबसे आगे नेता हैं, उसके बाद बाबा और फिर अधिकारी आते हैं। हमाम में हम सब नंगे हैं। उनके इस बयान के दौरान सदन में कई बार शेम-शेम के नारे भी सुनाई दिए।
पप्पू यादव ने नेताओं पर तंज कसते हुए यह भी दावा किया कि इंटरनेट पर सबसे ज्यादा पोर्न देखने वालों में नेता शामिल हैं। इस बयान ने सदन का माहौल और ज्यादा गरमा दिया।
महिला आरक्षण बिल पर बोलते हुए पप्पू यादव ने इसे पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि यह बिल सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा जिन्होंने इतिहास में महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक आजादी नहीं दी, आज वही आरक्षण की बात कर रहे हैं।
पप्पू यादव ने मांग की कि महिला आरक्षण के भीतर भी अलग-अलग वर्गों के लिए कोटा तय किया जाए। इसमें ओबीसी (OBC), ईबीसी (EBC), दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक शामिल है। उनका कहना है कि बिना इस व्यवस्था के यह बिल समानता नहीं ला पाएगा।
सांसद ने समाज के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि सिनेमा, मीडिया और फैशन जैसे क्षेत्रों में 80% तक महिलाओं का शोषण होता है।