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डिलिमिटेशन विवाद: अमित शाह के 50% फॉर्मूले पर उठे सवाल, शशि थरूर बोले जल्दबाजी लोकतंत्र के लिए खतरनाक

परिसीमन को लेकर संसद में विवाद गहराया है। शशि थरूर ने इसे जल्दबाजी में लाया गया कदम बताते हुए महिला आरक्षण को इससे अलग लागू करने की मांग की और सरकार के 50% फॉर्मूले पर सवाल उठाए।
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भारत

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Ankit Sai

Apr 17, 2026

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कांग्रेस नेता शशि थरूर (सोर्स: ANI)

Delimitation Dispute: भारत में संसद की सीटों के पुनर्निर्धारण यानी डिलिमिटेशन को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। केंद्र सरकार महिला आरक्षण लागू करने के साथ डिलिमिटेशन को जोड़ रही है, जिस पर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई है। इस मुद्दे पर लोकसभा में तीखी बहस देखने को मिली। मुख्य विवाद तब उभरा जब कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने परिसीमन को जल्दबाजी में लाने का आरोप लगाया और इसे नोटबंदी जैसी प्रक्रिया से जोड़ते हुए गंभीर चेतावनी दी।

परिसीमन पर थरूर का तीखा बयान

लोकसभा में बोलते हुए शशि थरूर ने कहा, “जिस तरह की जल्दबाजी आपने नोटबंदी में दिखाई थी, वैसी ही जल्दबाजी अब परिसीमन में दिख रही है। और हम जानते हैं कि नोटबंदी ने देश को कितना नुकसान पहुंचाया। परिसीमन भी पॉलिटिकल डीमॉनेटाइजेशन साबित होगा।” उन्होंने सरकार से अपील करते हुए साफ कहा, “इसे मत कीजिए।” थरूर का तर्क था कि प्रस्तावित कानून केवल जनगणना के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण की बात करता है, जिससे दक्षिणी राज्यों जैसे केरल की सीटें कम हो सकती हैं, जबकि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों को ज्यादा लाभ मिल सकता है।

अमित शाह के 50% फॉर्मूले पर सवाल

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि संसद की कुल सीटों में 50% की बढ़ोतरी होगी, जिससे राज्यों का अनुपात समान रहेगा। लेकिन थरूर ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह केवल राजनीतिक आश्वासन है, कानूनी गारंटी नहीं। उन्होंने कहा, “यह 50% फॉर्मूला कानून में कहीं दर्ज नहीं है। यह एक अस्थिर राजनीतिक आश्वासन है।” थरूर ने यह भी जोड़ा कि परिसीमन आयोग को पूरी स्वतंत्रता दी गई है और उसके फैसलों को अदालत में चुनौती भी नहीं दी जा सकती, जिससे भविष्य में इस फॉर्मूले को बदला जा सकता है।

महिला आरक्षण को अलग लागू करने की मांग

थरूर ने महिला आरक्षण के समर्थन में स्पष्ट रुख अपनाया, लेकिन इसे परिसीमन से अलग करने की मांग की। उन्होंने कहा, “हमें महिला आरक्षण से कोई समस्या नहीं है, इसे तुरंत लागू किया जा सकता है, लेकिन परिसीमन को इसके साथ जोड़ना सही नहीं है।” उन्होंने सुझाव दिया कि परिसीमन जैसे जटिल मुद्दे पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए, जिसमें दक्षिण, पूर्वोत्तर और छोटे राज्यों की राय भी शामिल हो। इसके अलावा, उन्होंने चेतावनी दी कि सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने से संसद का संचालन और कठिन हो जाएगा, खासकर तब जब संसद सत्र के दिन पहले ही कम हो चुके हैं।