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ठहाकों से गूंज उठा संसद, पीएम मोदी की पत्नी को लेकर राहुल गांधी ने ऐसा क्या कह दिया?

Rahul Gandhi: राहुल गांधी ने महिला आरक्षण संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान कुछ ऐसा कहा कि पूरा संसद ठहाकों से गूंज उठा।

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Apr 17, 2026
फोटो में राहुल गांधी (सोर्स: ANI)

Rahul Gandhi Parliament Speech: लोकसभा का माहौल उस समय अचानक दिलचस्प हो गया, जब महिला आरक्षण संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने ऐसा बयान दे दिया, जिसे सुनकर पूरा सदन ठहाकों से गूंज उठा। गंभीर मुद्दे पर बोलते-बोलते उन्होंने हंसी का ऐसा तड़का लगाया कि कुछ पल के लिए राजनीतिक बहस भी मुस्कान में बदल गई। दरअसल, महिलाओं की भूमिका पर बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि हमारे जीवन में मां, बहन और पत्नी जैसे कई रूपों में महिलाओं का बड़ा योगदान होता है, लेकिन ‘पीएम और मेरी तो पत्नी ही नहीं हैं।’ यह सुनते ही सांसदों के बीच हंसी छूट गई और माहौल हल्का हो गया।

इस मजाकिया टिप्पणी के बाद राहुल गांधी ने अपने विचारों को गंभीरता से आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि महिलाएं आज देश की सेंट्रल और ड्राइविंग फोर्स बन चुकी हैं। साथ ही उन्होंने अपनी बहन प्रियंका गांधी का जिक्र करते हुए उनकी तारीफ की और बताया कि उन्होंने बहुत कम समय में प्रभावशाली तरीके से अपनी बात रखी। अपने भाषण में उन्होंने अपनी दादी इंदिरा गांधी को याद करते हुए कहा कि उन्होंने उन्हें निडरता, सत्य और अहिंसा का महत्व सिखाया।

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राहुल गांधी ने रिजर्वेशन बिल की आड़ में अपना एजेंडा आगे बढ़ाने का लगाया आरोप

बता दें लोकसभा में राहुल गांधी ने बिल पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि सरकार महिला आरक्षण बिल के नाम पर अपना राजनीतिक एजेंडा आगे बढ़ा रही है। उनके मुताबिक, यह असली महिला सशक्तिकरण का बिल नहीं है, बल्कि चुनावी नक्शा बदलने की कोशिश है।

राहुल गांधी ने मांग की कि 2023 में पास हुए बिल की बजाय पुराना महिला आरक्षण बिल वापस लाया जाए, जिसे कांग्रेस समर्थन देने को तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बिल के जरिए जाति जनगणना जैसे मुद्दों को पीछे किया जा रहा है और खासकर OBC और कमजोर वर्गों के लोगों को उनका सही प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार आरक्षण के नाम पर अपने राजनीतिक फायदे के लिए काम कर रही है। राहुल गांधी के अनुसार, बीजेपी अपनी ताकत कम होने के डर से देश के चुनावी माहौल को बदलने की कोशिश कर रही है।

डीलिमिटेशन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इससे दक्षिण भारत के राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है, जिसका कांग्रेस विरोध करती है। उन्होंने इस कदम को एंटी-नेशनल तक बताया। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि देश की नौकरशाही, न्यायपालिका और निजी क्षेत्र में दलित और OBC वर्ग को बराबर हिस्सा क्यों नहीं मिल रहा है।

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