अमेरिका में प्रवेश करने के लिए पटेल ने अपनी गुजराती पहचान छोड़कर पाकिस्तानी पहचान अपनाई।
गुजरात के एसी पटेल एक साधारण व्यक्ति थे, लेकिन उनकी कहानी अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी और मानव तस्करी की सनसनीखेज घटना बन गई। 2016 में उनका भारतीय पासपोर्ट समाप्त हो गया था। इसे नवीनीकृत करने के बजाय, उन्होंने अवैध रास्ता चुना और दुबई में तस्करों से संपर्क किया। वहां एक एजेंट ने उन्हें मोहम्मद नजीर हुसैन नाम का एक पाकिस्तानी पासपोर्ट दिया। यह कोई साधारण नकली दस्तावेज नहीं था, बल्कि एक असली पासपोर्ट था, जो अपने मूल मालिक से खो गया था और तस्करों ने इसका गलत इस्तेमाल किया। पटेल ने अपनी गुजराती पहचान छोड़कर यह नई पहचान अपनाई, ताकि अमेरिका में प्रवेश कर सकें।
पटेल का सपना था अमेरिका पहुंचना, लेकिन उनकी योजना तब धरी रह गई जब अमेरिकी अधिकारियों ने उनकी असलियत पकड़ ली। जनवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप के नए कार्यकाल के बाद अमेरिका ने अवैध आप्रवासियों के खिलाफ सख्ती बढ़ा दी। पटेल इस नकली पासपोर्ट के साथ अमेरिका पहुंचे थे, लेकिन वहां की जांच में उनकी पोल खुल गई। अमेरिकी एजेंसियों ने उन्हें पकड़ा और 12 फरवरी, 2025 को फ्लाइट AA-292 से दिल्ली वापस भेज दिया। पिछले एक महीने में 74 गुजरातियों सहित सैकड़ों भारतीयों को इसी तरह निर्वासित किया गया है।
दिल्ली हवाई अड्डे पर पटेल का स्वागत पुलिस ने किया। अधिकारियों को उनके पास से मिला पाकिस्तानी पासपोर्ट देखकर हैरानी हुई। पूछताछ में पटेल टूट गए और सच उगल दिया—उन्होंने दुबई में एक एजेंट को पैसे देकर यह पहचान खरीदी थी। अब उन पर धोखाधड़ी और पासपोर्ट के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप हैं। यह मामला मानव तस्करी के खतरों और सख्त आप्रवासन नीतियों की सच्चाई को सामने लाता है। पटेल का अमेरिकी सपना टूट गया, और अब वह कानूनी पचड़े में फंस गए हैं। उनकी कहानी उन तमाम लोगों के लिए सबक है जो अवैध रास्तों से सपने पूरे करने की कोशिश करते हैं।