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तमिलनाडु चुनाव: क्षेत्रीय दलों TVK-NTK का कैडर-आधारित नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संदेश, नेताओं के रिश्तेदारों की एंट्री से वंशवाद पर चर्चा

तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हैं। इस बार के चुनाव में कई प्रमुख दलों के उम्मीदवारों के साथ-साथ राजनेताओं के परिजन चुनावी मैदान में उतरे हैं। ऐसे में वंशवाद पर चर्चा हो रही है।
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Apr 14, 2026
Election
तमिलनाडु चुनाव का विश्लेषण (सांकेतिक इमेज)

Nadu Assembly Elections 2026: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में इस बार नेताओं के रिश्तेदारों की मौजूदगी और उनकी सक्रियता खास चर्चा का विषय बनी हुई है। राज्य की राजनीति लंबे समय से वंशवाद और पारिवारिक प्रभाव के लिए जानी जाती रही है और इस बार भी कई प्रमुख दलों के उम्मीदवारों के साथ-साथ राजनेताओं के परिजन चुनावी मैदान में उतरे हैं।

चुनावी मैदान में प्रमुख नेताओं के परिजनों-रिश्तेदारों की एंट्री

तमिलनाडु चुनाव में राजनीतिक दलों के प्रमुख नेताओं, मुख्यमंत्री, मंत्री, पूर्व मंत्री, विधायक, पूर्व विधायक के नाते-रिश्तेदार, पुत्र, पत्नी जोर आजमाइश कर रहे हैं। इसमें सबसे आगे राज्य के दोनों प्रमुख द्रविड़ दल हैं। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन अपने बेटे एवं डिप्टी सीएम उदयनिधि स्टालिन के साथ विधानसभा चुनाव के मैदान में हैं। स्टालिन की ही पार्टी में DMK के पूर्व मंत्री पोनमुडी के बेटे गौतम सिगामणी, वरिष्ठ मंत्री आइ पेरिसामी के बेटे सेंथिल कुमार को पार्टी ने टिकट दिया है। इसके अलावा कई विधायक पुत्र भी चुनाव में अपना भाग्य आजमा रहे हैं। दूसरे दल AIADMK ने टिकट वितरण में कुछ वरिष्ठ नेताओं के रिश्तेदारों को मौका दिया है।

AIADMK ने खुद को DMK की तरह वंशवादी न दिखाने की कोशिश की है, लेकिन कुछ सीटों पर परिवारवाद साफ दिखाई देता है। पूर्व मंत्री वेलुमणि एवं वरिष्ठ नेता शणमुगम के रिश्तेदारों को पार्टी ने टिकट दिया है। इसी तरह NDA गठबंधन में शामिल PMK ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और पार्टी प्रमुख अंबुमणि रामदास की पत्नी सौम्या अंबुमणि को धर्मपुरी से टिकट दिया है। गठबंधन में शामिल DMK ने इस विधानसभा चुनाव में कुछ टिकट वरिष्ठ नेताओं के रिश्तेदारों को दिए हैं। सबसे प्रमुख नाम पार्टी संस्थापक विजयकांत की पत्नी प्रेमलता विजयकांत और उनके बेटे विजय प्रभाकरन के हैं।

TVK और NTK का कैडर-आधारित नेतृत्व को आगे बढ़ाने पर जोर

DMK एवं AIADMK के नेतृत्व वाले दोनों ही प्रमुख गठबंधनों में शामिल अन्य छोटे-बड़े दल परिवारवाद से परहेज करते दिखाई पड़ रहे हैं। राष्ट्रीय दल कांग्रेस एवं BJP भी टिकट बंटवारे में वंशवाद से दूर दिखाई पड़ रहे हैं। दोनों ही दलों ने किसी भी बड़े नेता के परिजन को चुनावी अखाड़े में नहीं उतारा है।

यही हाल CPI एवं CPM का है। इसके अलावा TVK और NTK दोनों ने 2026 चुनाव में अपने टिकट वितरण से यह संदेश दिया है कि वे वंशवाद से दूरी बनाकर नई राजनीति और कैडर-आधारित नेतृत्व को आगे बढ़ाना चाहते हैं। दोनों ही दलों के ज्यादातर उम्मीदवार युवा कार्यकर्ता, सामाजिक आंदोलन से जुड़े लोग और स्थानीय कैडर हैं। इन दोनों दलों ने बिना किसी अन्य दल से गठबंधन किए सभी 234 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं।

Updated on:
14 Apr 2026 02:10 am
Published on:
14 Apr 2026 02:10 am