
पवन खेड़ा (ANI)
कांग्रेस और बीजेपी के बीच बयानबाजी अब अदालत तक पहुंच चुकी है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई ने इस विवाद को और गंभीर बना दिया है। मुख्य मुद्दा कांग्रेस नेता पवन खेड़ा से जुड़ा है, जिन्हें अदालत से तत्काल राहत नहीं मिली और अब उनकी गिरफ्तारी का खतरा बढ़ गया है।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा दी गई ट्रांजिट बेल पर लगी रोक हटाने से इनकार कर दिया। इसका मतलब है कि पवन खेड़ा अब असम पुलिस की कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं। हालांकि अदालत ने उन्हें गुवाहाटी हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल करने की अनुमति दी। साथ ही यह भी कहा कि वहां की अदालत इस मामले को केवल तथ्यों के आधार पर देखे। सुनवाई के दौरान अदालत ने खेड़ा द्वारा गलत आधार कार्ड पेश करने पर नाराजगी भी जताई। खेड़ा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अंतरिम राहत की मांग की, जिसे खारिज कर दिया गया। इसी दौरान उन्होंने भावुक होकर कहा, “क्या मैं आतंकी हूं?”
यह पूरा विवाद 4 अप्रैल की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से शुरू हुआ। इसमें कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमन्त बिश्व शर्मा की पत्नी पर आरोप लगाया कि उनके पास तीन देशों के पासपोर्ट और विदेशों में छिपी हुई संपत्ति है। मुख्यमंत्री के परिवार ने इन आरोपों को गलत बताया और कहा कि ये कागजात नकली हैं, जिन्हें एआई (AI) की मदद से बनाया गया है। इसके बाद गुवाहाटी में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई।
तेलंगाना हाई कोर्ट ने पहले खेड़ा को एक हफ्ते की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, ताकि वे असम में नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकें। लेकिन असम पुलिस ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद यह राहत रुक गई। अब पवन खेड़ा को गुवाहाटी हाई कोर्ट में अपनी जमानत याचिका दाखिल करनी होगी। यह मामला राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बन गया है और आने वाले दिनों में इसका असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।
Published on:
17 Apr 2026 05:01 pm
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