प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्रिसमस पर राष्ट्रपति भवन से सटे कैथेड्रल चर्च ऑफ़ द रिडेम्पशन में आयोजित प्रार्थना सभा में शामिल हुए। कैथेड्रल चर्च ऑफ़ द रिडेम्पशन की नींव तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन ने रखी थी। इस साल इसे बने हुए 90 साल पूरे हो रहे हैं। वास्तुकला के लिहाज से यह बेजोड़ है। आइए जानते हैं यह क्यों खास है...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) क्रिसमस पर राष्ट्रपति भवन से सटे कैथेड्रल चर्च (Cathedral Church) ऑफ़ द रिडेम्पशन में आयोजित प्रार्थना सभा में शामिल हुए। कैथेड्रल चर्च ऑफ़ द रिडेम्पशन की नींव तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन ने रखी थी। इसका निर्माण कार्य 1927 से 1931 तक चला। इस चर्च का नाम "रिडेम्पशन" (मुक्ति) ईसाई धर्म की मूल अवधारणा से लिया गया है, जो पापों से मुक्ति का प्रतीक है। बेशक, यह स्थान न केवल पूजा स्थल है, बल्कि दिल्ली की ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा भी है, जो ब्रिटिश वास्तुकला और भारतीय संस्कृति के मेल को दर्शाता है। आप इसे समावेशी भारत का अति महत्वपूर्ण प्रतीक मान सकते हैं।
इसका डिजाइन हेनरी अलेक्जेंडर मेड ने तैयार किया था। मेड भी नई दिल्ली के चीफ आर्किटेक्ट एडविन लुटियन की टीम का हिस्सा थे। ये नई दिल्ली में बने पहले दो चर्चो में से एक है। मेड ने ही गोल डाक खाना पर स्थित सेक्रेड हार्ट चर्च को भी डिजाइन किया था। मेड के डिजाइन किए चर्च वास्तव में बहुत खूबसूरत हैं। वे नई दिल्ली आए थे सन् 1919 में। वे तब 23 साल के थे। बहुत उत्साही और प्रयोगधर्मी वास्तुकार थे।
कैथेड्रल चर्च ऑफ़ द रिडेम्पशन का उद्घाटन 15 फरवरी, 1931 को लाहौर के बिशप की मौजूदगी में हुआ था। पर कायदे से ये चर्च पूरी तरह से बनकर तैयार हुई 1935 में ही। यानी इसे बने हुए 90 साल हो गए हैं। देश की आजादी तक यहां पर राजधानी में रहने वाले गोरे ही आते थे। इधर प्रार्थना अंग्रेजी, हिन्दी और मलयालम में होती है।
कैथेड्रल चर्च ऑफ द रिडेम्पशन की भव्यता कमाल की है। सफेद पत्थर और लाल बलुआ पत्थर से बनी यह इमारत आकर्षक है, जिसमें गुंबद, मेहराब और स्तंभ प्रमुख हैं। मुख्य प्रवेश द्वार पर ऊंचे मेहराब हैं, जो रोमन कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट शैलियों का मिश्रण दर्शाते हैं। चर्च के अंदर का भाग विशाल है, जहां ऊंची छतें हैं। चर्च के अंदर क्रॉस और बाइबिल की नक्काशी है, जबकि दीवारों पर धार्मिक चित्र उकेरे गए हैं। बाहरी डिजाइन में दो घंटाघर हैं।
आपको चर्च परिसर में हरा-भरा लॉन मिलता है। यहां दर्जनों पेड़ लगे हैं, जो अब बुजुर्ग हो चुके हैं। इन्होंने नई दिल्ली का विकास होते देखा है। इसके आगे-पीछे बगीचा है। वहां पर फूलों की क्यारियां हैं। इसकी एंट्री पश्चिम दिशा से और निकासी पूर्वी दिशा की ओर है। इसके ठीक आगे राष्ट्रपति भवन है। आप इधर आकर महसूस करते हैं कि मानों आप किसी अलग संसार में ही पहुंच गए हों। इस चर्च में बड़ी संख्या में राजधानी में रहने वाले विदेशी नागरिक और नॉर्थ ईस्टर्न राज्यों के नागरिकों को भी देख सकते हैं। कैथेड्रल चर्च ऑफ द रिडेम्पशन दिल्ली की सांस्कृतिक धरोहर है, जो इतिहास, वास्तुकला और सद्भावना का प्रतीक है। यहां की शांति और सुंदरता हर किसी को आकर्षित करती है।