भारत और श्रीलंका के नेताओं के बीच हुई बातचीत में ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच दोनों देशों ने साझेदारी मजबूत करने और भविष्य में मिलकर चुनौतियों से निपटने की प्रतिबद्धता दोहराई।
PM Modi Talk to Srilanka President: मंगलवार को भारत और श्रीलंका के रिश्तों को लेकर एक अहम बातचीत हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से फोन पर चर्चा की। बातचीत सामान्य औपचारिकता तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें वैश्विक हालात, खासकर पश्चिम एशिया में बदलते घटनाक्रम पर गंभीर विचार किया गया। दोनों नेताओं ने इस बात पर चिंता जताई कि दुनिया भर में ऊर्जा सप्लाई पर दबाव बढ़ रहा है। तेल और गैस की उपलब्धता पर असर पड़ रहा है, जिसका असर सीधे देशों की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर दिख सकता है। इसी वजह से ऊर्जा सुरक्षा इस बातचीत का सबसे अहम मुद्दा बनकर उभरी।
इस दौरान भारत और श्रीलंका के बीच चल रही ऊर्जा से जुड़ी परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत दिखे कि अब सिर्फ योजनाओं की बात नहीं, बल्कि उन्हें तेजी से जमीन पर उतारने की जरूरत है। ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने का फैसला भी लिया गया। बातचीत में एक और अहम पहलू सामने आया क्षेत्रीय स्थिरता। दोनों देशों ने माना कि अगर क्षेत्र में शांति और संतुलन बना रहता है, तो विकास की रफ्तार भी बेहतर होगी। इसलिए सुरक्षा और सहयोग, दोनों को साथ लेकर चलने पर जोर दिया गया।
भारत और श्रीलंका के रिश्ते वैसे भी नए नहीं हैं। ये संबंध सालों पुराने हैं, जिनकी जड़ें संस्कृति, धर्म और इतिहास में गहराई तक जुड़ी हैं। हालांकि, कुछ दौर ऐसे भी आए जब रिश्तों में खटास आई। जैसे श्रीलंका का गृहयुद्ध और उस दौरान भारतीय शांति सेना की भूमिका। लेकिन समय के साथ दोनों देशों ने इन चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए रिश्तों को फिर मजबूत किया। आर्थिक स्तर पर भी दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ा है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट ने व्यापार को नई दिशा दी। हाल ही में जब श्रीलंका आर्थिक संकट से जूझ रहा था, तब भारत ने आगे बढ़कर मदद की। करीब 4 अरब डॉलर की सहायता, जिसमें ईंधन, खाद्य सामग्री और क्रेडिट लाइन शामिल थी, ने श्रीलंका को बड़ी राहत दी। कोविड के समय भी भारत ने वैक्सीन और ऑक्सीजन भेजकर साथ निभाया। आज हालात ये हैं कि दोनों देश सिर्फ पड़ोसी नहीं, बल्कि भरोसेमंद साझेदार बन चुके हैं। रक्षा, डिजिटल भुगतान, ऊर्जा कनेक्टिविटी और व्यापार हर क्षेत्र में सहयोग बढ़ रहा है।