
देश आज विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मना रहा है। इस मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी ने उन लाखों लोगों को श्रद्धांजलि दी है, जिन्होंने विभाजन के भयानक दौर की पीड़ा को सहते हुए देश की तरक्की में अपना योगदान दिया। आज सोशल मीडिया पर पीएम मोदी ने लिखा कि वे उन सभी देशवासियों को हृदय से नमन करते हैं, जिन्होंने उस वीभत्स दौर से निकलकर भी देश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा कि उस समय कई जिंदगियां तहस-नहस हो गई थीं। परिवार बिखर गए, लोगों ने अपने प्रियजनों को हमेशा के लिए खो दिया और भारी पीड़ा झेली। उन्होंने कहा कि यह इतिहास का वह दौर था जिसने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया था, लेकिन उस मुश्किल घड़ी में भी लोगों ने हार नहीं मानी।
पीएम मोदी ने आगे लिखा कि उन कठिन परिस्थितियों से उबरते हुए लोगों ने अपनी जिंदगी को नए सिरे से खड़ा किया। उन्होंने चुनौतियों को अपनी कामयाबी में बदला और देश की तरक्की में बड़ा योगदान दिया। पीएम ने कहा कि उनकी यह संघर्ष यात्रा हमें इंसानी हिम्मत की असली ताकत का एहसास कराती है।
विभाजन विभीषिका दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से आपसी सद्भाव और भाईचारे को बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह दिन हमारे इस संकल्प को और मजबूत करे कि हम सब मिलकर एकजुटता की राष्ट्रीय भावना को सशक्त बनाएं और 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने की दिशा में साथ मिलकर काम करें।
इस अवसर पर पीएम मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् भी साझा किया, "उद्यमस्य प्रसादेन दृश्यन्ते विविधाः कलाः। कातरा एव जल्पन्ति यद् भाव्यं तद् भविष्यति।" इस श्लोक का अर्थ समझाते हुए उन्होंने कहा कि परिश्रम, उद्यम और पुरुषार्थ से ही विविध कलाएं, विज्ञान, तकनीकी कौशल, शिल्प और नवाचार विकसित होते हैं, जो सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने कहा कि इंसान को कभी भाग्य के भरोसे नहीं बैठना चाहिए, बल्कि साहस, कर्मठता और निरंतर प्रयास के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते रहना चाहिए, क्योंकि पुरुषार्थ ही असल में भाग्य का निर्माता होता है।