राष्ट्रीय

प्रताप बाजवा ने भगवंत मान पर उठाए सवाल, अकाल तख्त पर पेश होकर सजा स्वीकार करने की दी सलाह, जानिए क्या है पूरा मामला

Sikh Institutions Controversy: पंजाब में 2026 संशोधन अधिनियम और कथित बेअदबी विवाद को लेकर सियासत गरमा गई है, जिसमें प्रताप सिंह बाजवा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तीखे सवाल उठाए हैं।
2 min read
• •
Updated: 29 Jun 2026, 1:02 PM IST
Bhagwant Mann Controversy
प्रताप बाजवा ने भगवंत मान पर उठाए सवाल (ANI)

Bhagwant Mann Controversy: पंजाब की राजनीति में इन दिनों धार्मिक भावनाओं और कानून को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तीखा हमला बोला है। यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में बेअदबी (सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ के अपमान से जुड़े मामलों) को लेकर सियासी और धार्मिक माहौल पहले से ही गर्म है। इस पूरे मामले के बीच अकाल तख्त साहिब ने राज्य सरकार के कई मंत्रियों और आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायकों को तलब किया है, ताकि वे जागृत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026 पर अपना पक्ष स्पष्ट कर सकें।

बाजवा का सीधा आरोप

प्रताप सिंह बाजवा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर वे वास्तव में सिख सिद्धांतों और परंपराओं में आस्था रखते हैं, तो उन्हें अकाल तख्त साहिब के सामने जाकर जवाब देना चाहिए और जो भी सजा तय हो, उसे स्वीकार करना चाहिए। बाजवा ने कहा कि यह मामला पूरी तरह धार्मिक और अकाल तख्त साहिब के अधिकार क्षेत्र का है, लेकिन मुख्यमंत्री की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि अगर कोई गलती हुई है, तो सिख मर्यादा के अनुसार उसे स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने अपने बयान में इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि महाराजा रणजीत सिंह जैसे महान सिख शासक भी अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता को मानते थे और आदेशों का पालन करते थे।

अकाली दल और अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया

मनप्रीत अयाली ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके लिए अकाल तख्त साहिब सर्वोच्च है और वे जत्थेदार के हर आदेश का पालन करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा में संशोधन विधेयक पारित करते समय सरकार को पारदर्शिता रखनी चाहिए थी ताकि किसी तरह के विवाद या दुरुपयोग की स्थिति न बनती। वहीं शिरोमणि अकाली दल ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक मामलों में अकाल तख्त साहिब का आदेश ही अंतिम माना जाएगा और सभी सिख प्रतिनिधि उसका पालन करेंगे।

अकाल तख्त का रुख

अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने राज्य सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि 2008 के कानून में संशोधन कर 2026 का नया अधिनियम पारित करना धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप जैसा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने गुरु और सिख के बीच हस्तक्षेप किया है, जिसके कारण अब सभी संबंधित मंत्रियों और विधायकों को तलब किया गया है ताकि वे अपना पक्ष रख सकें।

मुख्यमंत्री मान का जवाब

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस विवाद पर बयान देते हुए कहा कि उनकी सरकार के सभी मंत्री और विधायक अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होंगे और अपना पक्ष रखेंगे। अमृतसर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने साफ कहा कि उनके लिए अकाल तख्त साहिब सर्वोच्च है और वे उसकी मर्यादा का पूरा सम्मान करते हैं।

क्या है 2026 संशोधन अधिनियम?

यह विवाद उस कानून से जुड़ा है जिसे पंजाब विधानसभा में 13 अप्रैल को पारित किया गया था और बाद में राज्यपाल की मंजूरी भी मिल गई। इस कानून में 2008 के मौजूदा अधिनियम में संशोधन किया गया है। नए संशोधन के तहत बेअदबी से जुड़े मामलों में सख्त सजा का प्रावधान किया गया है, जिसमें आजीवन कारावास और ₹5 लाख से ₹20 लाख तक का जुर्माना शामिल है। हालांकि, धार्मिक संस्थाओं का कहना है कि इस कानून को बनाने से पहले व्यापक परामर्श नहीं किया गया, जिससे विवाद और बढ़ गया।

Updated on:
29 Jun 2026, 1:02 PM IST
Published on:
Also Read
View All
कर्नाटक में भाजपा युवा मोर्चा अध्यक्ष की दबंगई, रिवॉल्वर-बंदूक से हवा में चलाईं छह गोलियां, वीडियो वायरल होने पर केस दर्ज

‘भतीजी की शादी में विवाद किया, मां-बहन से भी संपत्ति के लिए लड़ रहे’, CM चंद्रबाबू नायडू ने जगन मोहन रेड्डी पर कसा तंज

राहुल गांधी 26 अक्टूबर को सुल्तानपुर MP/MLA कोर्ट में होंगे पेश, मानहानि केस में आ सकता है फैसला

भ्रष्टाचार में दोषी पूर्व DGP को सजा पर राहत के बाद अब चाहिए विदेश जाने की अनुमति, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

‘500 करोड़’ की ऑडियो क्लिप से महाराष्ट्र की सियासत में घमासान, मनोज जरांगे का दावा- मुझे मारने की रची जा रही साजिश