
Pre-Matric Scholarship 2026: केंद्र सरकार ने अनुसूचित जातियों और बाकी पात्र वर्गों के बच्चों की प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए आधार सत्यापन के नियमों में कुछ बदलाव किए हैं। ये नियम सीधा-सीधा उन बच्चों पर असर डालते हैं, जो इस छात्रवृत्ति के सहारे अपनी पढ़ाई जारी रखते हैं। अब, नई व्यवस्था में अगर किसी के पास आधार नंबर नहीं है या फिर पहचान सत्यापन में दिक्कत आती है, तो उसके लिए भी रास्ता खुला है। इसलिए बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए इन नए नियमों को जानना जरूरी है।
सरकार ने छात्रवृत्ति पाने वालों की पहचान दुरुस्त रखने के लिए आधार से जुड़ी प्रक्रिया को थोड़ा और सख्त और साफ किया है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने 16 अक्टूबर 2026 को ये अधिसूचना जारी की, जो 21 अक्टूबर को राजपत्र में भी प्रकाशित हो चुकी है।
ये सारे बदलाव आधार अधिनियम 2016 की धारा 7 के तहत लागू हैं। अब छात्रवृत्ति पाने के लिए छात्रों को या तो आधार से पहचान करानी होगी या फिर आधार नंबर होने का सबूत देना होगा।
इस बार नियमों में ऐसे छात्रों का भी ख्याल रखा गया है, जिन्होंने अब तक आधार के लिए आवेदन नहीं किया। इन बच्चों को जल्द ही आधार नामांकन के लिए अप्लाई करना होगा। अगर बच्चा छोटा है, तो उसके माता-पिता या कानूनी अभिभावक की सहमति जरूरी है।
अधिकारियों को यह भी देखना होगा कि ऐसे बच्चों का नामांकन हो भी रहा है या नहीं, और अगर कहीं नाम, जन्मतिथि वगैरह की गड़बड़ी है तो उसे सही भी करवाना होगा। इसके लिए जितनी भी जरुरी सुविधाएं हैं, वो मुहैया कराना विभाग की जिम्मेदारी है।
कागजों की बात करें तो सरकार ने पहचान और पात्रता के लिए कई विकल्प दिए हैं। आपको जन्म प्रमाणपत्र, राशन कार्ड, पासपोर्ट, वोटर आईडी, जाति या निवास प्रमाणपत्र, बोर्ड की मार्कशीट या कोई मान्यता प्राप्त शैक्षणिक प्रमाणपत्र देना है, इनमें से जो उपलब्ध हो। सरकारी दफ्तर या पीएसयू का जारी किया गया आईडी कार्ड, या दिव्यांगता प्रमाणपत्र भी चलेगा। अगर बच्चा अपने असली अभिभावकों के साथ नहीं रह रहा, तो कोर्ट या सक्षम अधिकारी द्वारा जारी अभिभावकत्व या गोद लेने के कागजात मांगे जा सकते हैं।
हर दस्तावेज़ हर छात्र पर लागू हो, ये जरूरी नहीं है। जो श्रेणी है, उसके हिसाब से चाहिए। नामित अधिकारी कागजों की अच्छे से जांच करेगा और ये भी देखेगा कि आधार नामांकन का नंबर सही है या नहीं।
ये नियम बच्चों के लिए राहत जैसा है–किसी भी बच्चे को सिर्फ इसलिए छात्रवृत्ति से बाहर नहीं कर सकते क्योंकि उसका आधार सत्यापन फेल हो गया, या उसके पास अभी आधार नंबर नहीं है। अगर आधार नंबर नहीं मिला है, लेकिन नामांकन का आवेदन दिया गया है, तो भी छात्रवृत्ति रुकेगी नहीं।
ऐसे मामलों में बच्चे की पहचान और उसके माता-पिता या अभिभावक के साथ रिश्ते का पता वैकल्पिक तरीकों से लगाया जाएगा। विभाग को ऐसे छात्रों का रिकॉर्ड भी रखना होगा और समय-समय पर उसकी जांच और ऑडिट करना पड़ेगा।
मंत्रालय की जिम्मेदारी है कि मीडिया के ज़रिए इन नियमों की पूरी जानकारी बच्चों और उनके परिवारों तक पहुंचाए। 18 साल या उससे ऊपर के बच्चों को छात्रवृत्ति से वंचित न किया जाए, इसके लिए भी अलग नियम हैं, जिनका पालन होना चाहिए।
ये बदलाव अहम इसलिए हैं क्योंकि छात्रवृत्ति से ही बहुत से बच्चों की पढ़ाई चलती रहती है। आधार की प्रक्रिया के साथ जो वैकल्पिक पहचान और अपवाद नियम तय किए गए हैं, वो बच्चों के हक की रक्षा में मदद करेंगे। सलाह दी जाती है कि छात्र और उनके परिवार अपने सारे कागजात तैयार रखें और किसी परेशानी की हालत में विभाग से संपर्क करें।