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Anti-national Controversy: “विरोध किया तो देशद्रोही?” मोदी सरकार पर प्रियंका का तीखा सवाल, मनोज झा ने भी खोल दी सवालों की पूरी फेहरिस्त!

Constitution and Democracy India: प्रधानमंत्री के राष्ट्र के शत्रु चुनने के तरीके पर आरजेडी सांसद और शिवसेना (यूबीटी) नेता ने खुलकर सवाल उठाए। बेरोजगारी, आय असमानता और लोकतंत्र की रक्षा को लेकर तीखा सवाल किया गया। क्या विपक्ष का यह रुख सत्ता पक्ष को झकझोर पाएगा?
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भारत

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Manoj Vashisth

•

Oct 21, 2026

Unemployment Is India’s Biggest Enemy

Unemployment Is India’s Biggest Enemy : मोदी के बयान से भड़का सियासी संग्राम! मनोज झा ने गिनाए देश के असली दुश्मन, प्रियंका ने संविधान पर उठाए सवाल (फोटो सोर्स: ANI)

Anti-national Controversy India: पटना और दिल्ली से आई ताजा टिप्पणियों ने राजनीति में खूब हलचल मचा दी है। प्रधानमंत्री मोदी के बयान पर विपक्ष के बड़े नेताओं ने जमकर निशाना साधा। आरजेडी संसद मनोज झा और शिवसेना (यूबीटी) की प्रियंका चतुर्वेदी खुलकर बोले, उन्होंने कहा कि असली मुद्दे, असली दुश्मन नजरअंदाज हो रहे हैं। ये नेता बेरोजगारी, आय में असमानता, सामाजिक सद्भाव, और लोकतांत्रिक अधिकारों पर सवाल उठा रहे हैं। साथ ही, उन्होंने सत्ता पक्ष की खामोशी और विरोध प्रदर्शन पर सख्त कार्रवाई को लेकर चिंता जताई। बहस सिर्फ बयानबाजी भर नहीं, देश की बड़ी चुनौतियों की तरफ ध्यान खींच रही है।

Manoj Jha on PM Modi: मनोज झा का मोदी सरकार पर निशाना, बेरोजगारी को बताया सबसे बड़ा दुश्मन

बिहार में मनोज झा ने मोदी के बयान का जवाब देते हुए कहा-दुश्मनों की पहचान में सत्ता चयनात्मक हो रही है। उनकी बात में दम है, बेरोजगारी सबसे बड़ा दुश्मन है, फिर भी सरकार कुछ बोल नहीं रही। आय असमानता जस की तस है, कोई जवाब तक नहीं। सामाजिक सद्भाव गिरता जा रहा है, विदेश नीति पर भी कोई साफ जवाब दूर-दूर तक नहीं। झा ने कहा, असली दुश्मनों के खिलाफ पूरे देश में एकजुटता है, इसमें कोई शक नहीं। लेकिन बिना केस के लोगों को जेल भेजना, तिरंगा लहराने पर जेल ये वाकई गंभीर बातें हैं। उन्होंने तो तंज भी मारा, पूछा क्या देवी दुर्गा ये सब देख रही होंगी?

Priyanka Chaturvedi Statement: प्रियंका चतुर्वेदी ने लोकतांत्रिक अधिकारों और विरोध प्रदर्शन पर उठाए सवाल

दिल्ली में प्रियंका चतुर्वेदी ने मसला उठाया। उनका कहना था कि सभी राजनीतिक दल खुद को देश हित के कामों में आगे बताते हैं, लेकिन हकीकत में देखना चाहिए, संवैधानिक और लोकतांत्रिक मुद्दों पर सरकार क्या कर रही है। गलवान घाटी हो या कोई भी मुश्किल समय, विपक्ष और सत्ता साथ खड़ा रहा है। लेकिन संवैधानिक अधिकारों, लोकतंत्र और विरोध प्रदर्शन में हिंसा क्या ये जायज है? शांतिपूर्ण प्रदर्शन हमारे संविधान में दर्ज है, फिर विरोध करते लोगों को देशद्रोही ठहराना कहां से सही है? चतुर्वेदी ने बोला कि सरकार को खुद से सवाल करना चाहिए लाठीचार्ज, आंसू गैस का इस्तेमाल, क्या ये लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं?

इन प्रतिक्रियाओं के बीच बेरोजगारी, आर्थिक असमानता और सामाजिक सद्भाव फिर चर्चा में हैं। सरकारी रिपोर्टें भी मानती हैं कि युवा रोजगार के लिए जूझ रहे हैं। पिछले सालों में कई घटनाएं सामाजिक सद्भाव पर सवाल खड़े कर चुकी हैं। विदेश नीति में भारत ने जरूर रफ्तार पकड़ी है, लेकिन कई फैसलों पर सवाल बने हुए हैं। विपक्ष इन मुद्दों को लेकर सरकार को घेर रहा है सरकार का कहना है कि विकास और सुरक्षा दोनों प्राथमिकता है।

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