
कार्यक्रम को संबोधित करते मोहन भागवत (फोटो सोर्स: RSS Facebook)
Bhagwat Vijayadashami Speech: राष्ट्रीय स्वयं सेवक के सरसंघचालक मोहन भागवत जब भी विजया दशमी के मौके पर संबोधित करते हैं, तो अपनी बातें घुमा-फिराकर करते हैं, लेकिन इस बार नागपुर से RSS चीफ ने साफ संदेश दिया। भागवत ने रिजीम चेंज की संभावना को खारिज करते हुए, पश्चिम में फ्रांस, इटली से लेकर पूर्व इंडोनेशिया तक जारी प्रदर्शनों पर अपनी राय रखी। उन्होंने देश को चेताया कि तूफान आ रहा है। इसलिए हमें होश से काम लेना होगा। भागवत ने अपने बयान में यहां तक कह दिया कि इस आग का असली निशाना भारत है। वह इस दौरान सरकार के कदमों का बचाव करते भी दिखे।
संघ और बीजेपी के बीच कई मुद्दों को लेकर असहमतियां हैं, लेकिन एक इन प्रदर्शनों पर वह बीजेपी के साथ खड़ी हुई दिखती है। संघ प्रमुख ने कई बार कहा है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ जब जोश हाई हो तो होश देने का काम करता है। कई मीडिया रिपोर्टों में यह बात भी सामने आई थी कि साल 2024 में तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष जेप नड्डा के बयान ( पार्टी को अब संघ के सहारे की जरूरत नहीं) और मोदी सरकार के रवैये के कारण संघ के साथ पार्टी और मातृसंगठन के बीच तल्खी आ गई थी। कई लोगों का मानना भी है कि बीजेपी का अल्पमत में आने की एक वजह संघ का साल 2024 के चुनाव के दौरान जोर-शोर से जुटना नहीं था। 2024 के विजयादशमी संबोधन में भागवत ने हिंदू एकता, बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति और महिला सुरक्षा की बात की थी। उन्होंने सांस्कृतिक मार्क्सवाद पर भी हमला बोला था।
हालांकि, अपने भाषण के दौरान भागवत ने बीजेपी को पूरी तरह छोड़ा नहीं। उन्होंने कहा कि कई बार लोग नेताओं पर भरोसा खो देते हैं, लेकिन उन्होंने इसमें किसी एक तरह के नेताओं को अलग नहीं किया। उनके मुताबिक ऐसे में समाज को जिम्मेदारी लेनी पड़ती है और इसमें संघ भी शामिल है। उन्होंने भारत के "विश्वगुरु" बनने की चर्चा का भी जिक्र किया। भागवत ने कहा कि नेताओं की "नई पीढ़ी", जिसका तन और मन स्वस्थ हो उसे यह जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी।
भागवत और संघ का रुख बीजेपी को लेकर धीरे-धीरे नरम पड़ता गया। जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर छात्र सड़क पर उतरे तो भागवत ने प्रदर्शनकारियों को लेकर नरम रुख अपनाया था। जुलाई में उन्होंने मुंबई के मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में करीब 2,000 युवाओं से संवाद भी किया था। अब भागवत को आशंका है कि ये प्रदर्शन राजनीति का औजार बन गए हैं, जिनका इस्तेमाल भारत को कमजोर करने वाली ताकतें कर रही हैं।
वहीं, अगले साल 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होना है। ऐसे में माना जा रहा है कि भागवत ने संघ कार्यकर्ताओं को संकेत दिए हैं वह पूरे मन विचारधारा के प्रति समर्पित हो जाएं। माना जा रहा है कि संघ उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की वापसी सुनिश्चित करने के लिए पहले ही जुट चुका है। संघ के कई लोग योगी को ऐसे नेता के रूप में देखते हैं जो राष्ट्रीय भूमिका निभाकर संघ के "सभ्यतागत एजेंडे" को आगे ले जा सकते हैं।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने फ्रांस में हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों से ऐसी लहर उठ रही है, जो शालीनता, व्यवस्था और संस्कारों को खत्म करना चाहती है। भागवत ने फ्रांस और अल्बानिया के साथ नेपाल और बांग्लादेश के हालात का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन देशों में क्या हो रहा है, इस पर गौर करना चाहिए।
सत्ता बदलने (रिजीम चेंज) की मांग करने वालों पर निशाना साधते हुए भागवत ने कहा कि कुछ लोगों को लगता है कि सरकार बदलने से हालात सुधर जाएंगे, लेकिन इतिहास में ऐसा नहीं हुआ है। उनके मुताबिक, पहले भी सिर्फ सत्ता बदलने से हालात नहीं सुधरे और आगे भी ऐसा होने की उम्मीद नहीं है।
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में बंगाल के राजनारायण बसु का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राजनारायण बसु के जन्म के 200 साल पूरे हो रहे हैं। उन्होंने लोगों को अपनी संस्कृति और पहचान से जोड़ने के लिए स्वदेशी मेलों के जरिए जागरूकता फैलाने की पहल की थी। इसी सोच के तहत उन्होंने हिंदू मेले की शुरुआत की थी।
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने विजयादशमी समारोह में संत रविदास के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि जब देश पर विदेशी आक्रमण हो रहे थे और लोगों को अत्याचार झेलने पड़ रहे थे, तब समाज में डर का माहौल था। ऐसे मुश्किल समय में संत रविदास ने लोगों को अपने धर्म पर टिके रहने, आपसी भेदभाव मिटाने और भक्ति का रास्ता अपनाने का संदेश दिया।
Updated on:
21 Oct 2026 12:43 pm
Published on:
21 Oct 2026 12:06 pm
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