
Harish Rawat Resignation Congress: पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले पार्टी के अंदर खींचतान और गुटबाजी सामने आ रही है। यह पहली बार नहीं है, पिछले विधानसभा चुनाव में भी पार्टी गुटबाजी के कारण हार का सामना करना पड़ा था। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच कलह हुई थी। दोनों नेताओं के बीच विवाद को सुलझाने के लिए पार्टी हाईकमान ने हरीश रावत को दी थी।
तत्कालीन पंजाब प्रभारी हरीश रावत ने कई दौर की बैठकें कीं, दोनों खेमों से बातचीत की और समझौते के संकेत भी दिए, लेकिन अंत में विवाद खत्म होने के बजाय ज्यादा बढ़ गया। फिर कैप्टन अमरिंद सिंह को सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा।
उनके स्थान पर चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया। पार्टी हाईकमान ने यह फैसला एंटी-इंकम्बेंसी से बचाने के लिए लिया था, लेकिन इसका असर उल्टा पड़ा। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पार्टी छोड़ दी और अपनी नई पार्टी बना बनाई। इसके साथ ही उन्होंने बीजेपी से भी गठबंधन कर लिया।
नवजोत सिंह सिद्धू और चरणजीत सिंह चन्नी के बीच भी तालमेल नहीं बैठा। पार्टी में भ्रम और विभाजन बढ़ता गया। 2022 के विधानसभा चुनाव में यही आंतरिक कलह कांग्रेस के लिए घातक साबित हुई। आम आदमी पार्टी ने 92 सीटें जीतकर सत्ता हासिल की, जबकि कांग्रेस महज 18 सीटों पर सिमट गई।
कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच कलह को समाप्त नहीं कर पाने के बाद पार्टी हाईकमान ने उनकी जगह हरीश चौधरी को पंजाब का प्रभारी बनाया।
पंजाब में कांग्रेस के अंदर कलह अभी भी जारी है। इस बार पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के बीच है। पार्टी ने दोनों नेताओं के बीच खींचतान को समाप्त करने के लिए भूपेश बघेल को जिम्मेदारी दी थी। लेकिन बघेल दोनों नेताओं के बीच कलह समाप्त नहीं कर सके।
इसके बाद पिछले दिनों पार्टी हाईकमान ने राजस्थान के वरिष्ठ नेता और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट को जिम्मेदारी दी है। पार्टी को इस बार चुनाव में संभावित जीत की तलाश है। इसलिए पार्टी बिना गुटबाजी और एकजुट होकर विधानसभा चुनाव लड़ना चाहती है।
उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने शनिवार को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी और कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) में अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। दरअसल, उन्होंने यह फैसले उनके ओएसडी चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के दौरान कथित तौर पर बड़ी मात्रा में नकदी और आभूषण बरामद होने की खबरों के बाद सामने आया है।
हरिश रावत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर पोस्ट कर अपने फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनके किसी कदम या उनके सहयोगी से जुड़े मामले के कारण कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष को किसी तरह की कमजोरी पहुंचे।