
ब्रह्मोस मिसाइल(फोटो-ANI)
भारत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। कई देशों के प्रमुखों के साथ पीएम मोदी द्विपक्षीय वार्ता कर रहे हैं। इस बातचीत में छोटे व मझौले देश अपनी सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत की तरफ देख रहे हैं। इंडोनेशिया से लेकर मिस्र तक भारतीय मिसाइल, तोप व रडार सिस्टम खरीदने में इच्छुक हैं।
ब्रिक्स समिट के लिए पहुंचे इंडोनेशिया के प्रमुख ने पीएम मोदी संग द्विपक्षीय बातचीत की। इस दौरे पर भी रक्षा सौदे होने की उम्मीद है। जुलाई 2026 में इंडोनेशिया ने भारत के साथ ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर करार किया, साथ ही एस्ट्रा एयर-टू-एयर मिसाइल सहयोग समझौता भी किया। वियतनाम भी अब भारत का अहम रक्षा साझेदार बनता जा रहा है, भारत ने वहां भी ब्रह्मोस डील की पुष्टि कर दी है, हालांकि इसकी पूरी शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं की गई हैं। फिलीपींस पहले से ही ब्रह्मोस खरीद चुका है, उसने तीन शोर-बेस्ड एंटी-शिप मिसाइल बैटरी के लिए 375 मिलियन डॉलर की डील की थी, जिसकी डिलीवरी 2026 में पूरी हो चुकी है।
आर्मेनिया भारत का एक और बड़ा ग्राहक बनकर उभरा है। उसने पिनाका रॉकेट लॉन्चर, आकाश-1एस एयर डिफेंस सिस्टम, एटीएजीएस तोप और स्वाति रडार जैसे कई भारतीय सिस्टम खरीदे हैं। हैरानी की बात यह है कि 2022 से 2024 के बीच आर्मेनिया के कुल हथियार आयात का करीब 43 फीसदी हिस्सा अकेले भारत से आया।
थाईलैंड फिलहाल ब्रह्मोस के शोर-बेस्ड एंटी-शिप सिस्टम को परख रहा है, हालांकि अभी यह बातचीत शुरुआती दौर में ही है। नाइजीरिया ने भारत के तेजस लड़ाकू विमान में दिलचस्पी दिखाई है, और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने इस पर बातचीत की पुष्टि भी की है। मिस्र ने भी तेजस में रुचि दिखाई है, जबकि अर्जेंटीना पहले इस विमान में दिलचस्पी दिखा चुका है, हालांकि इसमें ब्रिटिश मूल के पुर्जे होने की वजह से मामला थोड़ा उलझा हुआ है। यूएई ने ब्रह्मोस के साथ-साथ भारत के आकाशतीर एयर डिफेंस कमांड सिस्टम पर भी नजर रखी है, और चिली, ब्राजील और सऊदी अरब जैसे देशों से भी ब्रह्मोस को लेकर पूछताछ आई है, हालांकि ये सब अभी बहुत शुरुआती स्तर पर हैं।
मालदीव, मॉरीशस, मोजांबिक, म्यांमार, सेशेल्स और श्रीलंका जैसे हिंद महासागर के देशों को भी भारत की तरफ से पेट्रोल एयरक्राफ्ट, पेट्रोल वेसल, हेलीकॉप्टर और रडार जैसे उपकरण मिल रहे हैं। यह भारत की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत नई दिल्ली खुद को एक भरोसेमंद और किफायती रक्षा साझेदार के तौर पर पेश करना चाहती है।
पीएम मोदी की इथियोपिया के प्रधानमंत्री आबी अहमद के साथ हुई बैठक में आर्थिक सहयोग और निवेश के मौकों पर बात हुई। इथियोपिया ने खास तौर पर भारतीय माइनिंग कंपनियों की भागीदारी का स्वागत किया। इसके साथ ही दोनों देशों ने संयुक्त प्रशिक्षण और रक्षा खरीद पर भी सहयोग बढ़ाने की बात कही। वहीं मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ बैठक में मोदी ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। मलेशिया की ब्रह्मोस में दिलचस्पी है, खासकर अपने Su-30 लड़ाकू विमानों के लिए एयर-लॉन्च वर्जन को लेकर, जो दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को नई दिशा दे सकता है।
Updated on:
12 Sept 2026 01:29 pm
Published on:
12 Sept 2026 01:29 pm
