
चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी समेत कार्यालय से जुड़े लोगों पर भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई को जांच सौंपने पर विपक्ष ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। विपक्ष के नेताओं ने कहा कि पंजाब के सरकारी खजाने को लूटने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए और उन्हें सजा मिलनी चाहिए।
पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि मैं हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करता हूं और उम्मीद करता हूं कि सीबीआई निष्पक्ष और तय समय-सीमा के भीतर जांच करेगी। पंजाब के सरकारी खजाने को लूटने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए और उन्हें सजा मिलनी चाहिए, चाहे वे कितने भी ताकतवर क्यों न हों।
वहीं, शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने 'एक्स' पोस्ट में लिखा कि भगवंत मान की ईमानदारी का नकाब पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने उतारा। मुख्यमंत्री दफ्तर और घर में हो रहे भ्रष्टाचार को लेकर ईडी की ओर से बार-बार लिखे जाने के बावजूद कार्रवाई न करने पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सारी जांच सीबीआई को दी है और 2 महीने में रिपोर्ट देने को कहा है।
उन्होंने आगे लिखा कि राजबीर घुम्मन, नितिन गुहाल, जतिन गुहाल समेत सबका पर्दाफाश होना है और सब जल्दी पकड़े जाएंगे। कर्मचारियों के डीए के मामले में टोपी सिन्हा ने किस तरह कोर्ट को गुमराह किया और कोर्ट ने टोपी सिन्हा को जमकर फटकार लगाई। अब गुरु-दोखी से लेकर अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया तक पूरा हिसाब होगा। सब पकड़े जाएंगे।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को आदेश दिया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को लिखे गए पत्रों से जुड़े मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए। कोर्ट ने यह फैसला वकील निखिल सराफ की ओर से दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनाया।
गौरतलब है कि ईडी ने पंजाब के डीजीपी को तीन पत्र लिखकर मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार में शामिल होने के आरोप लगाए थे और उन पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। पंजाब पुलिस की ओर से मामला दर्ज न किए जाने के बाद हाईकोर्ट में यह जनहित याचिका दायर की गई थी।