
Amit Shah on Punjab Law and Order: पंजाब की कानून-व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक कार्यकर्ता की दिनदहाड़े हत्या और दबाव में एक पिता की मौत ने पूरे राज्य में चिंता बढ़ा दी है। गृह मंत्री अमित शाह ने इन घटनाओं को लेकर भगवंत मान सरकार को सीधे निशाने पर लिया है। उन्होंने पूछा है कि आखिर पंजाब की जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन उठाएगा। शाह के इस तीखे रुख ने राजनीतिक बहस को नया मोड़ दे दिया है।
पंजाब में नशे, गैंगस्टरवाद और संगठित अपराध की बढ़ती समस्या पर केंद्र सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को X पर एक पोस्ट में भगवंत मान सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य की जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर कौन निभाएगा। पीटीआई के अनुसार, शाह ने हाल की दो घटनाओं का जिक्र करते हुए कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।
मानसा में नशे के खिलाफ सक्रिय रहे परविंदर सिंह झोटा की दिनदहाड़े हत्या ने पूरे राज्य को झकझोर दिया। झोटा ने मेडिकल स्टोर संचालक पर नशीली दवाएं बेचने का आरोप लगाते हुए फेसबुक लाइव किया था। उसी दौरान उन्हें गोली मार दी गई। उनके पिता ने एएपी सरकार और स्थानीय विधायक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। घटना के बाद आरोपी को राजस्थान से गिरफ्तार किया गया, लेकिन परिवार ने सीबीआई जांच और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है और शांति बनाए रखने की अपील की ।
दूसरी ओर, संगरूर के दिरबा क्षेत्र में एक पिता गुल्जार सिंह ने दबाव में जहर खा लिया। वे वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से गांव में नशे की आसान उपलब्धता और अपने बेटे की लत के बारे में सवाल पूछने के बाद परेशान थे। परिवार का आरोप है कि स्थानीय नेताओं और पंचायत सदस्यों ने उन्हें माफी मांगने के लिए दबाव डाला, जिसके बाद उन्होंने ये कदम उठाया।
अमित शाह ने इन दोनों घटनाओं पर गृह मंत्रालय द्वारा पंजाब सरकार से जवाब मांगे जाने की बात कही। उन्होंने लिखा कि पंजाब में नशे का कारोबार दिन-ब-दिन बढ़ रहा है, संगठित अपराध का खतरा बढ़ रहा है और नशे के खिलाफ बोलने वालों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। शाह ने भगवंत मान से सीधे संबोधित करते हुए कहा कि जनता वादों से नहीं, जवाबों से संतुष्ट होगी। उन्हें नतीजे चाहिए, नशे के नेटवर्क पर निर्णायक प्रहार चाहिए और अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण मिलने की किसी भी संभावना की निष्पक्ष जांच चाहिए।
शाह ने पंजाब की जनता के सामने अपना संकल्प दोहराया कि भाजपा की सरकार बनने पर वे नशामुक्त, गैंगस्टरमुक्त और सुरक्षित पंजाब बनाने के लिए पूरी ताकत लगाएंगे। उनका लक्ष्य स्पष्ट है- नशे के कारोबार पर प्रहार, युवाओं के भविष्य की रक्षा, अपराधियों पर सख्त कार्रवाई और ऐसा कानून का राज जहां कोई नागरिक डर के साये में न जीए।
यह बयान ऐसे समय आया है जब पंजाब नशे की समस्या से लंबे समय से जूझ रहा है। एनसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में देश भर में जब्त हेरोइन का 58 प्रतिशत हिस्सा अकेला पंजाब से आया। ड्रोन के जरिए पाकिस्तान सीमा से तस्करी के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। राज्य सरकार दावा करती है कि युद्ध नशे के खिलाफ अभियान में हजारों गिरफ्तारियां हुईं और रिकॉर्ड हेरोइन जब्त की गई, लेकिन विपक्ष कहता है कि सड़कों पर नशा अब भी आसानी से उपलब्ध है।
इससे पहले भी अमित शाह ने जालंधर में नशा मुक्त पंजाब यात्रा के समापन पर कहा था कि भाजपा को मौका मिले तो 31 दिसंबर 2029 तक चिट्टा का कारोबार खत्म कर देंगे। उन्होंने आरोप लगाया था कि एएपी सरकार ने एनसीओआरडी की बैठकें नहीं कीं और एनसीबी ऑफिस खोलने का विरोध किया। पंजाब में गैंगस्टर गतिविधियों और संगठित अपराध की घटनाएं भी समय-समय पर सुर्खियां बनती रही हैं।