Raghav Chadha ने आप के दो-तिहाई सांसदों के साथ बीजेपी में जाने का ऐलान किया है। जानिए कैसे राघव चड्ढा ने खोया अरविंद केजरीवाल का विश्वास।
राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी (आप) में करीब 14 साल लंबा अपना कैरियर खत्म कर लिया है। उन्होंने बीजेपी के साथ अपनी राजनीतिक पारी आगे बढ़ाने का फैसला किया है। वैसे उनके इस फैसले का अनुमान तो लगाया ही जा रहा था, लेकिन 24 अप्रैल को उन्होंने औपचारिक ऐलान कर दिया। उन्होंने आप के सात राज्य सभा सांसदों के बीजेपी में जाने की घोषणा की। इसका अनुमान पहले से किसी को नहीं था।
बक़ौल चड्ढा, बीजेपी में जाने वाले आप के छह और सांसद हैं हरभजन सिंह, राजेन्द्र गुप्ता, विक्रम साहने, स्वाति मालीवाल, संदीप पाठक, अशोक मित्तल। इसके बाद पार्टी के केवल तीन सांसद रह जाएंगे।
राघव चड्ढा पेशे से सीए हैं। वह कुछ युवा पेशेवरों के साथ इंडिया अगेन्स्ट करप्शन (आईएसी) से जुड़े थे। इसी संगठन के बैनर तले दिल्ली के रामलीला मैदान में अन्ना हज़ारे के नेतृत्व में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन हुआ था। इसी आंदोलन के गर्भ से आम आदमी पार्टी का जन्म हुआ था।
आप में रहते हुए राघव चड्ढा की काफी तरक्की हुई। शुरू में वह दिल्ली की केजरीवाल सरकार का बजट ड्राफ्ट करने में मदद करते थे। बाद में वह आप के बड़े नेताओं के सलाहकार बन गए। केजरीवाल ने उन्हें आप की नौ सदस्यों वाली राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) में अहम भूमिका दी।
2018 में चड्ढा विधायक बने और 2019 में आप ने उन्हें दक्षिण दिल्ली से लोक सभा का टिकट भी दिया। वह लोक सभा चुनाव हार गए। अंत में मार्च 2022 में आप ने उन्हें पंजाब से राज्य सभा का सांसद बनाया। साथ ही, सदन में पार्टी के उप नेता का भी दायित्व दिया।
2022 में पंजाब विधान सभा चुनाव में आप का काफी अच्छा प्रदर्शन रहा। इसमें भी चड्ढा की भूमिका मानी जाती है। इसके बाद ही केजरीवाल का उन पर भरोसा और बढ़ गया। चड्ढा चुनाव से पहले जहां उम्मीदवार चुनने से लेकर हर छोटे-बड़े फैसले में शामिल होते थे, वहीं भगवंत मान सरकार बनने के बाद सरकारी मसलों में भी दखल देते थे। सरकार ने सीएम हाउस के पास ही चंडीगढ़ में उन्हें एक शानदार बंगला भी दिया।
राज्य सभा जाने के बाद चड्ढा का रुख थोड़ा बदल गया। आप नेताओं पर जब कानूनी शिकंजा कसने लगा तो चड्ढा ज्यादा सक्रिय नहीं दिखाई देते थे।
सबसे पहले सतेंदर जैन की गिरफ्तारी हुई। जैन दिल्ली सरकार के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री थे। मई में आप के मीडिया प्रभारी विजय नायर, सितंबर में मनीष सिसोदिया और मार्च 2024 में खुद अरविंद केजरीवाल जेल भेज दिए गए।
कहा जाता है कि अपने तमाम बड़े नेताओं की गिरफ्तारियों के खिलाफ सक्रिय होने के बजाय चड्ढा ने पंजाब की भगवंत मान सरकार के कामकाज में दखल बढ़ाना शुरू किया और राज्य सभा में अपना कद ऊपर करने की कोशिश करने लगे। पार्टी के लोग कहते हैं की केजरीवाल की गैर मौजूदगी में चड्ढा उनकी तरह ही व्यवहार करना चाहते थे। यहीं से पार्टी और उनके विचार अलग दिशा में जाते दिखने लगे।
राघव चड्ढा ने जिस तरह राज्य सभा से आम आदमी पार्टी को एक तरह से खत्म करने के कदम का ऐलान कर दिया है, वह पार्टी के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जाता है। अब तक पार्टी से नेता या तो बाहर हुए हैं या बाहर किए गए हैं, लेकिन इससे पार्टी को इतना बड़ा नुकसान नहीं हुआ है। ये टेबल देखिए:
| नेता का नाम | पार्टी में भूमिका | अलग होने का वर्ष | कारण / वर्तमान स्थिति |
| योगेंद्र यादव | संस्थापक सदस्य, रणनीतिकार | 2015 | आंतरिक लोकतंत्र और मतभेदों के कारण निकाला गया। अब 'स्वराज इंडिया' के अध्यक्ष हैं। |
| प्रशांत भूषण | संस्थापक सदस्य, कानूनी विशेषज्ञ | 2015 | पार्टी नेतृत्व (अरविंद केजरीवाल) पर तानाशाही का आरोप लगाया। स्वराज अभियान से जुड़े। |
| कुमार विश्वास | संस्थापक सदस्य, कवि | 2018-20 (सक्रियता खत्म) | राज्यसभा टिकट न मिलने और नेतृत्व से वैचारिक मतभेदों के कारण किनारे हुए। अब सक्रिय राजनीति से दूर हैं। |
| शांति भूषण | वरिष्ठ वकील, मुख्य संरक्षक | 2015 | नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाए। (दिवंगत) |
| किरण बेदी | इंडिया अगेंस्ट करप्शन का हिस्सा | 2015 | AAP में शामिल नहीं हुईं, बीजेपी में चली गईं और दिल्ली में CM उम्मीदवार बनीं। पुडुचेरी में गवर्नर रहीं। |
| आशुतोष | पूर्व पत्रकार, प्रवक्ता | 2018 | व्यक्तिगत कारणों का हवाला देकर इस्तीफा दिया। वर्तमान में फिर से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। |
| कपिल मिश्रा | पूर्व मंत्री (दिल्ली सरकार) | 2017 | केजरीवाल सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। अब भाजपा के कद्दावर नेता और दिल्ली सरकार में मंत्री हैं। |
| अलका लांबा | विधायक (चांदनी चौक) | 2019 | पार्टी नेतृत्व से अनबन। वापस कांग्रेस में शामिल हो गईं। |
| एच. एस. फुल्का | वरिष्ठ वकील, पंजाब नेता | 2019 | इस्तीफा दिया। |
| कैलाश गहलोत | कैबिनेट मंत्री (दिल्ली) | 2024 | हाल ही में 'शीशमहल' विवाद और पार्टी के मूल सिद्धांतों से भटकने का आरोप लगाकर भाजपा में शामिल हुए। |
| राजकुमार आनंद | पूर्व मंत्री (दिल्ली) | 2024 | भ्रष्टाचार के आरोपों और दलित प्रतिनिधित्व की अनदेखी का आरोप लगाकर पार्टी छोड़ी। |
अरविंद केजरीवाल को इस बात का गुरूर भी था कि उनकी पार्टी में टूट-फूट नहीं होती। वह इसका बखान भी करते थे। अब उनके इस बयान को याद दिला कर सोशल मीडिया पर लोग उन्हें ट्रोल कर रहे हैं। उनका पुराना बयान सुनिए: