आईआरसीटीसी ने बेस किचन में सीसीटीवी कैमरे लगाकर निगरानी शुरू की।
रेल यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। अब उन्हें फूड पैकेज पर उसकी गुणवत्ता जांचने का मौका मिलेगा। भारतीय रेलवे और आईआरसीटीसी ने यात्रियों के लिए खाने की पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में यह बड़ा कदम उठाया है। अब से चुनिंदा ट्रेनों और स्टेशनों पर मिलने वाले खाने के पैकेट्स पर क्यूआर (QR) कोड लगाए जाएंगे। इन कोड को स्कैन करते ही यात्री यह जान सकेंगे कि भोजन कब पैक हुआ है? किस बेस किचन से आया है? और उसकी वास्तविक कीमत कितनी है?
रेलवे का यह कदम लंबे समय से यात्रियों की उन शिकायतों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, जिनमें साफ-सफाई, ज्यादा कीमत वसूलने और खाने की क्वालिटी पर सवाल उठते रहे हैं। पहले भी आईआरसीटीसी ने बेस किचन में सीसीटीवी कैमरे लगाकर निगरानी शुरू की थी, लेकिन अब एक कदम आगे बढ़ाते हुए हाई-फ्रिक्वेंसी कैमरे और आधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम दिल्ली स्थित कंट्रोल रूम से जोड़े गए हैं। इसकी मदद से अधिकारियों और आईआरसीटीसी की टीम को रियल-टाइम में किचन से लेकर ट्रेन की ट्रे तक हर प्रक्रिया पर नजर रखने की सुविधा मिलेगी।
सबसे पहले यह व्यवस्था पटना-कोलकाता वंदे भारत एक्सप्रेस पर शुरू की गई है। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इसे अन्य वंदे भारत ट्रेनों और बाद में देशभर की प्रमुख ट्रेनों तक विस्तार देने की योजना है।
क्यूआर कोड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यात्री को आधिकारिक कीमत तुरंत पता चल जाएगी। इससे कैटरिंग स्टाफ या वेंडर द्वारा अधिक वसूली की संभावना काफी हद तक घटेगी। आईआरसीटीसी के रीजनल मैनेजर राजेश कुमार ने कहा कि हमारा उद्देश्य यात्रियों को पारदर्शिता देना और यह दिखाना है कि वे किस चीज के लिए भुगतान कर रहे हैं।
इसके अलावा, दानापुर मंडल के कई बड़े स्टेशनों पर भी इस सिस्टम का ट्रायल किया गया है। यहां यात्री न केवल खाने की जानकारी देख सकते हैं, बल्कि उसी प्लेटफॉर्म पर शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं। शिकायत सीधे कंट्रोल रूम तक पहुंच जाती है, जिससे हल की प्रक्रिया तेज होती है।
रेलवे अफसरों का मानना है कि यह पहल न सिर्फ यात्रियों के विश्वास को मजबूत करेगी बल्कि कैटरिंग सेवाओं में जवाबदेही भी सुनिश्चित करेगी। अगले चरण में इस तकनीक को और ट्रेनों व स्टेशनों पर लागू किया जाएगा।