
AIIMS Delhi : नई दिल्ली। राजस्थान के कोटा की 15 वर्षीय तन्वी की मंगलवार तड़के दिल्ली स्थित एम्स में मौत हो गई। वह महज दो साल की उम्र से जटिल जन्मजात हृदय रोग के इलाज के लिए एम्स के चक्कर लगा रही थी। उसकी मौत उस रिपोर्ट के करीब दो सप्ताह बाद हुई, जिसमें परिवार ने आरोप लगाया था कि 13 साल से उसकी हृदय सर्जरी का इंतजार किया जा रहा था। तन्वी करीब दो सप्ताह पहले एम्स में भर्ती हुई थी। उसके पिता मुकेश परियानी का आरोप है कि अस्पताल में कई बार सर्जरी की तारीख तय की गई, लेकिन बाद में उसे बदल दिया गया और सुधारात्मक सर्जरी नहीं हो सकी।
तन्वी के पिता मुकेश पारियानी ने बताया कि उनकी बेटी को जन्मजात 'वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) विद पल्मोनरी एट्रेसिया' नामक दिल की बीमारी थी। वर्ष 2012 में उसे पहली बार एम्स लाया गया था। 31 जनवरी 2014 के एम्स के दस्तावेजों में बच्ची की सर्जरी की सिफारिश की गई थी, जिसके लिए करीब 1.2 लाख रुपए का एस्टीमेट दिया गया था। परिजनों का आरोप है कि 2015 में सर्जरी की तारीख तय की गई, लेकिन ऐन वक्त पर प्रक्रिया टाल दी गई और उसके बाद कभी सर्जरी नहीं की गई।
मामले में एम्स के कार्डियो थोरैसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) विभाग के अध्यक्ष डॉ. वी. देवागुरु ने बताया कि 2013 में तन्वी का मूल्यांकन किया गया था। लेकिन 2018 में उसकी शारीरिक स्थिति (फेफड़ों की मुख्य धमनियों के न होने) को देखते हुए सर्जरी की संभावना को खारिज कर दिया गया था और दवाइयों से इलाज जारी रखा गया। हाल ही में 24 अगस्त को उसे हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट के मूल्यांकन के लिए भर्ती किया गया था।
चिकित्सकों के मुताबिक, ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया के तहत सोमवार शाम करीब 7 बजे तन्वी की एंडोस्कोपी की गई थी। देर रात करीब 2:50 बजे उसने कमजोरी की शिकायत की और शरीर नीला पड़ने लगा। उसकी ऑक्सीजन सेचुरेशन गिरकर 48 प्रतिशत रह गई। तड़के 3:30 बजे उसे ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया, लेकिन 'हाइपोक्सिक स्पेल' के कारण उसे कार्डियक अरेस्ट आ गया। सुबह 5:06 बजे डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
तन्वी के पिता मुकेश परियानी ने आरोप लगाया कि अस्पताल के कर्मचारियों ने उनसे बार-बार दस्तावेज मांगे और अलग-अलग मौकों पर बेटी को अस्पताल से डिस्चार्ज कराने का दबाव भी बनाया। उन्होंने कहा कि उन्हें बेटी की मौत को लेकर अब तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। तन्वी के पिता ने किसी गड़बड़ी की आशंका जताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है और जवाब न मिलने तक बेटी का शव लेने से इनकार कर दिया है।