
नेपाल बाढ़ अपडेट। फोटो सोर्स-ANI
Nepal Floods: नेपाल के नुवाकोट जिले में 26 अगस्त को आई भीषण फ्लैश फ्लड के बाद विस्थापित हुए लोगों के लिए नेपाल-भारत मैत्री भवन एक अहम राहत केंद्र बन गया है। भारत के सहयोग से बने इस भवन में स्थित अस्पताल में बाढ़ प्रभावित लोगों को रहने की जगह, चिकित्सा सुविधा और जरूरी मदद उपलब्ध कराई जा रही है।
भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ के कारण नुवाकोट और आसपास के इलाकों में भारी तबाही हुई। कई लोगों ने अपने घर और सामान खो दिए। ऐसे में अपेक्षाकृत ऊंचाई वाले स्थान पर स्थित मैत्री भवन सैकड़ों प्रभावित लोगों के लिए सुरक्षित ठिकाना बना हुआ है।
मैत्री भवन में वैकल्पिक अस्पताल संचालित होता है। अस्पताल के प्रमुख डॉ. नरेंद्र प्रसाद गिरी के मुताबिक, बाढ़ के बाद ऐसे लोगों के लिए भवन के दरवाजे खोल दिए गए, जिनके पास रहने के लिए कोई दूसरी जगह नहीं थी। उन्होंने बताया कि हर रात 100 से ज्यादा विस्थापित लोग यहां ठहर रहे हैं। इसके अलावा आसपास बनाए गए होल्डिंग सेंटरों में रह रहे लोगों को भी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
मैत्री भवन का मौजूदा भवन 2015 के भूकंप के बाद पुनर्निर्मित किया गया था। इसके पुनर्निर्माण में भारतीय दूतावास ने आर्थिक सहायता दी थी। डॉ. गिरी ने बताया कि बाढ़ में प्रभावित और बचाए गए कई लोगों को यहां लाकर इलाज दिया गया, जिसके बाद उनकी स्वास्थ्य स्थिति स्थिर है।
बाढ़ के बाद करीब 6 लोग खुद अस्पताल पहुंचे थे। इनमें कुछ लोगों को मामूली चोटें आई थीं, जिनमें टांके लगाने की जरूरत पड़ी। एक व्यक्ति के हाथ की नस में चोट थी, जिसकी अगले दिन अस्पताल में मरम्मत की गई। अस्पताल में फिलहाल करीब 11 डॉक्टर, पांच से सात नर्स और पांच से छह पैरामेडिक्स तैनात हैं। जरूरत पड़ने पर आसपास के राहत केंद्रों में मोबाइल मेडिकल टीमें भी भेजी जा रही हैं।
डॉ. नरेंद्र प्रसाद गिरी ने बताया कि फिलहाल अस्पताल में दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता है और सप्लाई चेन भी बेहतर तरीके से काम कर रही है। अस्पताल सिर्फ अपने परिसर तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत के मुताबिक मोबाइल टीमों के जरिए दूसरे स्थानों पर भी चिकित्सा सहायता पहुंचाई जा रही है।
बाढ़ से बचकर अस्पताल पहुंचे एक व्यक्ति ने बताया कि जब बाढ़ आई, तब वह खाना खा रहा था। उसने बताया कि खाना शुरू किए उसे कुछ ही समय हुआ था कि बाढ़ का पानी वहां तक पहुंच गया। बकरियों को बचाने की कोशिश के दौरान वह बाढ़ के पानी में बह गया। बाद में एक पेड़ की जड़ पकड़कर उसने खुद को बचाया। इस दौरान उसकी छोटी उंगली में गंभीर चोट आई और इलाज के लिए वह अस्पताल पहुंचा। उसने बताया कि अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सों ने उसे भरोसा दिया कि वे उसकी चोट का इलाज करेंगे। पीड़ित ने अस्पताल में मिल रही देखभाल और सुविधाओं के लिए आभार जताया।
पीड़ित ने नेपाल के लिए भारत की मदद का जिक्र करते हुए भारत सरकार के प्रति आभार जताया। उसने भारत को नेपाल का पड़ोसी और मित्र बताया और कहा कि इस मुश्किल समय में भारत की ओर से काफी सहायता मिली है।
एक अन्य बाढ़ प्रभावित राजू थापा मगर ने भी भारत सरकार की मदद के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि बाढ़ के बाद जिला अस्पताल तक पहुंचने वाली सड़क बाधित है, ऐसे में अस्पताल के विकल्प सीमित हो गए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में मैत्री भवन में उपलब्ध चिकित्सा सुविधा बेहद मददगार साबित हो रही है।
भीमा भंडारी ने बताया कि वह एक वृद्धाश्रम में रह रही थीं। उनके मुताबिक, बाढ़ का पानी बहुत तेजी से बढ़ा और वहां रहने वाले छह बुजुर्गों की समय पर निकासी नहीं हो पाने के कारण मौत हो गई। बाद में सुरक्षा कर्मियों ने बचे हुए लोगों को वहां से निकालकर अस्पताल पहुंचाया। भंडारी के मुताबिक, मैत्री भवन में उन्हें भोजन, रहने की जगह और चिकित्सा सुविधा मिल रही है। उन्होंने इस बुनियादी ढांचे के लिए भारत सरकार का आभार जताया और बुजुर्गों के लिए एक समर्पित आवास के पुनर्निर्माण में आगे भी सहायता जारी रखने की अपील की।
नेपाल में बाढ़ से हालात गंभीर बने हुए हैं। नेपाल पुलिस के अनुसार, बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,127 हो गई है। अकेले नुवाकोट से 155 शव बरामद किए गए हैं।
नेपाल में बाढ़ के बाद भारत ने मानवीय सहायता भी बढ़ाई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि नेपाल के लिए पांचवां भारतीय विमान रवाना हुआ है। इसमें 11 सदस्यीय विशेष बचाव दल और 5.5 टन जरूरी दवाएं भेजी गई हैं। भारत ने नेपाल में राहत एवं बचाव अभियान और पीड़ितों की पहचान में सहायता के लिए विशेष बचाव और फोरेंसिक टीमों को भी तैनात किया है।
Updated on:
02 Sept 2026 02:10 pm
Published on:
02 Sept 2026 02:09 pm
