
अमेरिका (United States of America) ने अपने FY27 के लिए नशीले पदार्थों से जुड़े आकलन में भारत, चीन और पाकिस्तान को ड्रग्स के ट्रांज़िट और गैर-कानूनी ड्रग्स बनाने वाले प्रमुख देशों की लिस्ट में शामिल किया है। इस लिस्ट में अफगानिस्तान, बोलीविया, म्यांमार और कोलंबिया जैसे देश भी शामिल हैं, जिन्हें ड्रग्स के खिलाफ अपनी ज़िम्मेदारियाँ पूरी न कर पाने के कारण अलग से चिह्नित किया गया है। अमेरिका की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लिस्ट में शामिल होने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि उस देश में कानून का पालन कमज़ोर है। इस मामले में अब भारत (India) की प्रतिक्रिया सामने आ गई है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल (Randhir Jaiswal) ने इस मामले में कहा, "हर तरह की गैर-कानूनी तस्करी और ड्रग्स की तस्करी को रोकने के लिए भारत और अमेरिका के बीच बहुत मज़बूत पार्टनरशिप है। हमारा मानना है कि ड्रग्स का मुद्दा दोनों देशों, वहाँ के लोगों और पूरी दुनिया के समाज के लिए नुकसानदायक है। यह हमारे समाज के खिलाफ है। इसीलिए जैसा कि मैंने पहले भी कहा है, इस मामले में दोनों देशों के बीच बहुत मज़बूत पार्टनरशिप है और हम इसे आगे भी जारी रखेंगे।"
इस लिस्ट में ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई के प्रदर्शन पर कोई सीधा फैसला नहीं है। इसमें भूगोल, व्यापार और केमिकल सप्लाई चेन जैसे कई पहलू शामिल हैं। इसके साथ ही भारत के मामले में इसमें लगातार पार्टनरशिप बनाए रखने और सहयोग करने के बारे में एक साफ नोट भी दिया गया है।
अमेरिकी वित्त वर्ष 2027 के लिए डोनाल्ड ट्रंप का फैसला, जो देश की कांग्रेस को भेजा गया है, 23 देशों को ड्रग्स की तस्करी के बड़े रास्तों या गैर-कानूनी ड्रग्स के बड़े उत्पादक देशों के तौर पर लिस्ट में शामिल है। इस लिस्ट में शामिल होने का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका की सरकार ड्रग्स नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम रही है। इस आकलन में कहा गया है कि किसी देश को इस लिस्ट में इसलिए भी शामिल किया जा सकता है क्योंकि उसकी लोकेशन, व्यापारिक संबंध या आर्थिक हालात उसे ड्रग्स या प्रीकर्सर केमिकल्स (ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल) की तस्करी के लिए उपयोगी बनाते हैं, भले ही वहाँ के अधिकारी ड्रग्स के खिलाफ मज़बूती से कार्रवाई कर रहे हों।