Rekha Patra BJP: पश्चिम बंगाल में बीजेपी विधायक रेखा पात्रा ने मवेशियों से भरे वाहन को रोककर गायों के जन्म प्रमाण पत्र मांगे। इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। टीएमसी नेता भी अब इस बयान पर तंज कस रहे हैं।
Rekha Patra BJP MLA: पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन को एक हफ्ता से ज्यादा का समय हो गया है। राज्य में लगातार नए मुद्दे उछाले जा रहे हैं। इसी बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों मवेशियों की तस्करी और अवैध कटान का मुद्दा भी गरमाया हुआ है। इसी बीच एक वीडियो ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। बीजेपी विधायक रेखा पात्रा ने मवेशियों से भरे एक वाहन को बीच रास्ते रुकवा दिया। इसके बाद जो हुआ, उसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जानकारी के मुताबिक, लेबुखाली इलाके से गुजर रहे एक वाहन में बड़ी संख्या में गायों को ले जाया जा रहा था। तभी विधायक रेखा पात्रा अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचीं और गाड़ी को रुकवा लिया।
उन्होंने वाहन में मौजूद गायों को नीचे उतरवाया और उनके लिए चारे-पानी की व्यवस्था भी कराई। हालांकि मामला तब ज्यादा चर्चा में आ गया, जब विधायक ने गायों के 'जन्म प्रमाण पत्र' की मांग कर दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के निर्देश के मुताबिक 14 साल से कम उम्र के मवेशियों की हत्या नहीं होनी चाहिए। ऐसे में अगर कोई गायों को अवैध तरीके से कटान के लिए ले जा रहा है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई जरूरी है। रेखा पात्रा ने कहा कि गायों को ले जाने वालों को यह साबित करना होगा कि मवेशियों की उम्र क्या है। अगर वे जन्म प्रमाण पत्र या कोई वैध डॉक्यूमेंट नहीं दिखा पाए, तो उनके खिलाफ कानूनी कदम उठाए जाएंगे। उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है।
बीजेपी विधायक के इस बयान के बाद सियासत और तेज हो गई। विपक्ष में बैठी तृणमूल कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर बीजेपी पर तंज कसना शुरू कर दिया। टीएमसी नेता कुणाल घोष ने व्यंग्य करते हुए कहा कि पहले बीजेपी किसी 'डबल इंजन' राज्य से गाय का जन्म प्रमाण पत्र लाकर दिखाए। कुणाल घोष ने कहा कि अगर बीजेपी ऐसा कोई प्रमाण पत्र दिखाने में सफल हो जाती है, तो फिर यह भी देखना पड़ेगा कि आखिर वह प्रमाण पत्र जारी किसने किया। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।
एक तरफ बीजेपी इसे अवैध पशु तस्करी के खिलाफ कार्रवाई बता रही है, तो दूसरी तरफ टीएमसी इसे राजनीतिक ड्रामा करार दे रही है। फिलहाल यह मामला बंगाल की राजनीति और सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बन गया है।