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असम चुनाव से पहले कांग्रेस को लगा बड़ा झटका, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रिपुन बोरा ने दिया इस्तीफा

असम में आगामी चुनावों से पहले कांग्रेस वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रिपुन बोरा ने इस्तीफा दे दिया है।

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पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रिपुन बोरा ने दिया इस्तीफा (ANI)

असम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेन बोरा ने सोमवार को एक चौंकाने वाला कदम उठाते हुए पार्टी से इस्तीफा देने का ऐलान किया है। यह फैसला असम में कांग्रेस पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक संकट का सामना कर रही है।

आत्म-सम्मान की रक्षा के लिए उठाया कदम

भूपेन बोरा ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा पत्र कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व को सुबह करीब 8 बजे भेज दिया था। उन्होंने इस फैसले को अपनी आत्म-सम्मान की रक्षा के लिए लिया। बोरा ने स्पष्ट रूप से कहा, "मैंने अपनी आत्म-सम्मान के लिए पार्टी छोड़ी है।"

कांग्रेस पार्टी की अंदरूनी समस्याओं को लेकर भूपेन बोरा का आक्रोश

भूपेन बोरा ने कांग्रेस पार्टी के कार्यों और नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी नेतृत्व संगठनात्मक मामलों में कोई ठोस और निर्णायक कदम उठाने में विफल रहा है। उनके अनुसार, "पार्टी यह तय नहीं कर पा रही है कि उसकी रैलियों में कौन शामिल हो और कौन नहीं।" इसके अलावा, बोरा ने पार्टी में बढ़ती हुई भ्रम और समन्वय की कमी की ओर भी इशारा किया। भूपेन बोरा ने कहा, "मैंने कांग्रेस पार्टी को अपने 32 साल दिए हैं," और साथ ही यह भी जोड़ा कि पार्टी के भीतर निरंतर आंतरिक समस्याओं और नेतृत्व की जड़ता के कारण उनके लिए पार्टी में बने रहना अब असंभव हो गया था।

पार्टी नेतृत्व से निराशा

भूपेन बोरा ने यह भी बताया कि कई बार अपनी चिंताओं को उठाने के बावजूद, पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से कोई ठोस और सार्थक प्रतिक्रिया नहीं मिली। इससे उनकी निराशा और असंतोष और गहरा हो गया, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने यह निर्णय लिया। बोरा ने स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा कोई अचानक लिया गया निर्णय नहीं था, बल्कि यह एक गहरे आत्ममंथन और सोच-समझकर लिया गया कदम था।

असम कांग्रेस के लिए बड़ा झटका

भूपेन बोरा का इस्तीफा असम कांग्रेस पार्टी के लिए एक बड़ा झटका है, खासकर जब पार्टी विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटी है। कांग्रेस पार्टी पहले ही राज्य में आंतरिक चुनौतियों और नेतृत्व संबंधी सवालों का सामना कर रही है। बोरा के इस्तीफे से पार्टी के भीतर और उथल-पुथल मच सकती है, जो आगामी चुनावी रणनीतियों और प्रदर्शन पर गहरा असर डाल सकता है।

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