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RSS का संगठनात्मक विस्तार और सामाजिक एजेंडा, जानिए शाखाओं की संख्या से लेकर नशामुक्ति अभियान तक की पूरी योजना

RSS की वार्षिक बैठक में संगठन विस्तार, युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और सामाजिक गतिविधियों पर चर्चा हुई। जानिए 99,423 शाखाओं, 88 संभागों और नशामुक्ति अभियान से जुड़ी पूरी जानकारी।
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Updated: 5 Nov 2026, 1:00 AM IST
RSS Annual Meeting
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(फोटो-IANS)

RSS Annual Meeting: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की वार्षिक बैठक का बुधवार को डेली कॉलेज परिसर में समापन हुआ। इसमें देशभर से 401 प्रतिनिधि शामिल हुए। शताब्दी वर्ष के दौरान संघ की गतिविधियों, शाखा विस्तार, सामाजिक कार्यों और आगामी संगठनात्मक बदलावों की समीक्षा की गई। बैठक में युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए इसके खिलाफ विशेष अभियान चलाने की योजना भी बनाई गई। संघ अब सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर नशे के विरुद्ध जनजागरण करेगा। साथ ही नशे की गिरफ्त में आ चुके युवाओं के पुनर्वास और काउंसलिंग के लिए भी काम करेगा। बैठक के बाद संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने बताया कि देशभर में वर्तमान में 63,208 स्थानों पर 99,423 शाखाएं संचालित हो रही हैं। वर्ष 2025 की तुलना में शाखाओं की संख्या में 12,025 की वृद्धि हुई है। इसी तरह साप्ताहिक मिलन की संख्या बढकऱ 34,982 हो गई है, जो पिछली बार से 2,612 अधिक है। शताब्दी वर्ष के दौरान देशभर में 65,664 हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए, जिनमें 4 करोड़ 93 लाख 76 हजार लोग शामिल हुए। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल क्षेत्र में शाखाओं की संख्या में डेढ़ सौ गुना वृद्धि हुई है।

नशे के नेटवर्क को खत्म करने की जरूरत


होसबाले ने कहा कि बैठक में युवाओं में नशे की बढ़ती आदत पर विस्तार से चर्चा हुई। यह समस्या कई वर्षों से देश के सामने है और समाज में इसे लेकर चिंता बढ़ रही है। सरकार अपने स्तर पर इस दिशा में काम कर रही है, लेकिन सामाजिक संगठन के नाते संघ भी अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर विशेष योजना बनाएगा। इसका उद्देश्य युवाओं को ड्रग्स, नारकोटिक्स और अन्य प्रकार के नशे का शिकार होने से बचाना है। उन्होंने कहा कि नशे के पीछे एक अंतरराष्ट्रीय बाजार और नेटवर्क काम करता है। सरकार को अपने स्तर पर इस नेटवर्क को समाप्त करने के प्रयास करने चाहिए।

प्रांतों की जगह बनेंगे 88 संभाग


संघ की संगठनात्मक संरचना में भी बड़ा बदलाव होने जा रहा है। होसबाले ने बताया कि अब प्रांतों के स्थान पर संभाग आधारित नई रचना तैयार की जाएगी। वर्तमान में संघ के 46 प्रांत हैं। नई व्यवस्था के तहत देशभर में 88 संभाग बनाए जाएंगे।

आपदा में 42 हजार से अधिक परिवारों तक पहुंचाई मदद


होसबाले ने बताया कि आपदा और विपरीत परिस्थितियों में स्वयंसेवक लगातार राहत कार्यों में जुटे रहे हैं। असम के शिवसागर और जोरहाट जिलों में बाढ़ के दौरान 1,600 से अधिक स्वयंसेवकों ने 42,200 परिवारों तक भोजन, पानी और दवाइयां पहुंचाईं। बाढ़ से 805 गांव प्रभावित हुए थे और 1,500 से अधिक मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। करीब 150 परिवारों को मकानों के पुनर्निर्माण के लिए सामग्री भी उपलब्ध कराई गई।

युवाओं के बीच 57 हजार से अधिक कार्यक्रम


शताब्दी वर्ष के दौरान संघ ने युवाओं के बीच संपर्क और संवाद बढ़ाने के लिए भी विशेष कार्यक्रम किए। इनमें सामान्यत: 35 वर्ष से कम आयु के महाविद्यालयीन विद्यार्थी और व्यवसायी युवा शामिल रहे। महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए 21,237 स्थानों पर और युवा व्यवसायियों के लिए 14,285 स्थानों पर संवाद कार्यक्रम एवं गोष्ठियां आयोजित की गईं। इस दौरान कुल 57,243 कार्यक्रम हुए। इनमें 31 लाख 26 हजार 404 महाविद्यालयीन विद्यार्थियों और 6 लाख 90 हजार 800 व्यवसायी युवाओं ने भाग लिया।

युवाओं के आंदोलनों को देशविरोधी नजरिए से नहीं देखें


जेन-जी, कथित आंदोलनों और रिजीम चेंज जैसे मुद्दों पर होसबाले ने कहा कि युवाओं का मुद्दे उठाना और अपनी बात रखना उनका अधिकार है। युवा पीढ़ी को देशविरोधी नहीं समझा जाना चाहिए। हालांकि, अराजक शक्तियों द्वारा युवाओं को भडक़ाकर अशांति और हिंसा फैलाना गलत है। युवाओं में व्यवस्था के प्रति विरोध का भाव हो सकता है, लेकिन इसका राजनीतिक इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं से सकारात्मक संवाद होना चाहिए और उनके मुद्दों का समाधान किया जाना चाहिए। होसबाले ने चुनाव आयोग की ओर से हाल ही में कराई गई एसआईआर प्रक्रिया को भी सही ठहराया। उन्होंने कहा कि तीन दिवसीय बैठक में विभिन्न सामाजिक और संगठनात्मक विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

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