राष्ट्रीय

भाजपा नेता BL संतोष के बयान पर भड़के प्रियांक खरगे, RSS की कानूनी पहचान और फंडिंग पर उठाए सवाल

RSS Accountability Controversy: आरएसएस के रजिस्ट्रेशन को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। कर्नाटक के होम मिनिस्टर प्रियांक खरगे ने बीजेपी लीडर बीएल संतोष के बयान पर सवाल उठाते हुए संगठन की कानूनी पहचान और जवाबदेही पर निशाना साधा।
2 min read
Aug 16, 2026
RSS Accountability Controversy
फोटो में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और कर्नाटक के होम मिनिस्टर प्रियांक खरगे (इमेज सोर्स: ANI)

RSS Registration Controversy: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS को लेकर कर्नाटक में सियासी बहस तेज हो गई है। विवाद संगठन के रजिस्ट्रेशन को लेकर है। बीजेपी नेता BL संतोष ने कहा है कि RSS को अपनी मौजूदगी साबित करने के लिए किसी रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है। अब कर्नाटक के होम मिनिस्टर प्रियांक खरगे ने इस बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि सवाल RSS के अस्तित्व का नहीं है। असली सवाल उसकी जवाबदेही और कानूनी पहचान का है।

प्रियांक खरगे ने पूछे कई सवाल

प्रियांक खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर BL संतोष के बयान पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि RSS करीब 100 साल पुराना संगठन है। देशभर में उसकी बड़ी पहुंच होने का दावा किया जाता है। ऐसे में उसकी कानूनी स्थिति को लेकर सवाल पूछना गलत नहीं है।

खरगे ने पूछा कि कानूनी तौर पर RSS की पहचान क्या है? संगठन की संपत्तियों का मालिक कौन है? उसके बैंक अकाउंट किस नाम से चलते हैं? उसे मिलने वाले डोनेशन किस कानूनी व्यवस्था के तहत आते हैं? उन्होंने ऑडिटेड अकाउंट और कानूनी खुलासों को लेकर भी सवाल उठाए।

अस्तित्व नहीं, जवाबदेही मुद्दा है: प्रियांक खरगे

प्रियांक खरगे ने अपने बयान में कहा कि किसी को इस बात पर शक नहीं है कि RSS मौजूद है। विवाद इस बात पर है कि संगठन किस कानून के तहत काम करता है। लोकतंत्र में बड़े और प्रभावशाली संगठनों से पारदर्शिता की उम्मीद भी बड़ी होती है। इसलिए RSS की कानूनी पहचान और जवाबदेही को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

BL संतोष ने रजिस्ट्रेशन की मांग खारिज की

प्रियांक खरगे की टिप्पणी बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव संगठन BL संतोष के बयान के बाद आई। संतोष ने RSS के रजिस्ट्रेशन की मांग को खारिज कर दिया था। हिंदू जागरण वेदिके के ‘अखंड भारत संकल्प दिवस’ कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि RSS की मौजूदगी किसी कानूनी कागज पर निर्भर नहीं है।

संतोष ने RSS के इतिहास का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश के विभाजन के समय संगठन बिना किसी औपचारिक रजिस्ट्रेशन के लोगों के साथ खड़ा था। उन्होंने यह भी कहा कि रजिस्ट्रेशन किसी संगठन के अस्तित्व को तय नहीं करता। उनके मुताबिक, RSS लाखों लोगों की आस्था और विश्वास के आधार पर काम करता है।

इस बयान के बाद अब दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक तरफ RSS के रजिस्ट्रेशन और कानूनी पहचान का सवाल उठ रहा है। दूसरी तरफ बीजेपी इसे संगठन की विचारधारा और लंबे इतिहास से जोड़कर देख रही है।

Also Read
View All
सुखजिंदर सिंह रंधावा का बड़ा दावा- पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनेगी, 2029 में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाएंगे

Vande Mataram Controversy: ‘सोनिया गांधी माफी मांगें’, अमित शाह के बयान पर कांग्रेस का जवाब- ‘अपनी नाकामियों का हिसाब दें’

‘इस तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए’, बंगाल में पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी के निधन को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार को घेरा

‘देशद्रोही कहा, 6 घंटे बंधक बनाकर गालियां दी’, राहुल गांधी के सामने नीट प्रदर्शनकारी छात्रों ने बयां किया अपना दर्द

वंदे मातरम विवाद: बेगूसराय में BJP का आक्रोश मार्च, गिरिराज सिंह बोले- मोदी जी को गाली देते-देते देश को बदनाम करने लगी कांग्रेस